जेल में कैदी की मौत, 15 लाख मिलेंगे!

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जेल में निरुद्ध कैदी की मौत के मामले में आज याचिकाकर्ता उसकी पत्नी को 15 लाख रुपये के मुआवजा तथा वाद व्यय के 25 हजार रुपए देने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायाधीश संजय अग्रवाल की युगलपीठ ने जांजगीर जिले की सरोज श्रीवास की याचिका पर मुआवजा तथा वाद व्यय के साथ ही जेलों में कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश राज्य के पुलिस महानिदेशक को दिए हैं। पीठ ने सुरक्षा उपाय संबंधी कार्रवाई से उच्च न्यायालय को अवगत कराने के भी आदेश दिए हैं। अधिवक्ता सुमित सिंह ने याचिकाकर्ता की ओर से याचिका में बताया कि उसके पति संतोष श्रीवास को अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम के तहत मई 2011 मे गिरफ्तार कर 03 मई 2011 को जांजगीर जेल भेज दिया गया था। जेल में बुरी तरह मारपीट के चलते दो दिन बाद ही 05 मई को उसकी मौत हो गयी। उसके शरीर पर मारपीट के निशान थे ही, हड्डियां भी टूट गई थीं। बाद में मृतक के खिलाफ लगाया गया आरोप भी झूठा पाया गया। कस्टोडियल ड़ेथ के मामले मे किसी भी न्यायालय द्वारा स्वीकृत 15 लाख रुपए की यह राशि एवं वाद व्यय सर्वाधिक होना बताया जा रहा है। इस मामले में राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेसक, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक जांजगीर को पक्षकार बनाया गया था। 
 

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