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ब्रेन डेड घोषित लोगों से मिला मरीजों को जीवनदान

पुणे/मुंबई। ब्रेन डेड घोषित कर दिए गए दो लोगों ने तीन मरीजों को जीवनदान दिया। अंग दाताओं में से एक के फेफड़े को पुणे से विमान के जरिए चेन्नई के अस्पताल में भेजा गया जबकि उसके दिल को मुंबई भेजा गया। चेन्नई के अस्पताल ने दावा किया कि देश में यह पहली बार है जब दान किए गए फेफड़े को मरीज में प्रतिरोपित करने के लिए इतनी लंबी दूरी तय की गई।

पुणे में रुबी हॉल क्लिनिक में 22 वर्षीय एक युवती को ब्रेन डेड घोषित किया गया था। 16 अगस्त को गिरने के कारण उसके सिर में चोट आई थी। युवती के पति ने अंग दान की इजाजत दे दी जिसके बाद उसके एक फेफड़े को विमान के जरिए गुरुवार को चेन्नई के ग्लेनिग्लेस ग्लोबल अस्पताल ले जाया गया। वहां इस अंग को मरीज के शरीर में सफलतापूर्वक प्रतिरोपित किया गया।

चेन्नई के अस्पताल ने एक विज्ञप्ति में दावा किया कि देश में इतनी अधिक दूरी से लाए गए फेफड़े के प्रतिरोपण का यह पहला मामला है। अस्पताल के डाक्टर संदीप अट्टवार ने कहा, पुणे के रुबी हॉल क्लिनिक में उपयुक्त फेफड़ा उपलब्ध होने का अलर्ट मिलने के बाद हमारी टीम वहां गई और शुरुआती जांच के बाद यह पाया गया कि फेफड़ा मरीज के लिए उपयुक्त है। हमारी मरीज फेफड़े से संबंधित बीमारी से जूझ रही थी, उसका रोग अंतिम चरण में पहुंच चुका था और वह प्रत्यारोपण के लिए दानदाता मिलने का इंतजार कर रही थी। उन्होंने बताया कि दानदाता के एक फेफड़े को गुरुवार तड़के करीब 1:30 निकाला गया और सड़क मार्ग से पुणे हवाईअड्डे लाया गया। दान किए गए अंग और प्रत्यारोपण करने वाले दल को लेकर विमान सुबह करीब साढ़े चार बजे चेन्नई हवाईअड्डे पर उतरा। डॉ अट्टवार ने बताया कि इसके बाद फेफड़े को 15 मिनट में चेन्नई के पेरुम्बक्कम उपनगर स्थित अस्तपाल लाया गया और मरीज में उसका सफल प्रतिरोपण किया गया।

इस बीच, महिला के दिल को गुरुवार को सड़क मार्ग से ग्रीन कोरिडोर बनाकर मुंबई में मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल लाया गया। ग्रीन कोरिडोर से 143 किलोमीटर की दूरी एक घंटे 49 मिनट में पूरी की गई। फोर्टिस अस्पताल द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, अंगदान करने वाली युवती का दिल घाटकोपर उपनगर की रहने वाली 24 वर्षीय कॉलेज छात्रा में प्रतिरोपित किया गया। वह दिल की बीमारी से पीड़ित थी और मई से प्रत्यारोपण का इंतजार कर रही थी।

इसके अलावा, 45 वर्षीय एक महिला का परिवार भी उसके अंग दान करने के लिए तैयार हो गया है। इस महिला की नवी मुंबई के वाशी स्थित एमजीएम अस्पताल में मौत हो गई थी। अस्पताल ने बताया कि उसके दिल को वाशी से सड़क मार्ग के जरिए 18 किलोमीटर की दूरी मात्र 16 मिनट में तय करके फोर्टिस अस्पताल लाया गया। यह अंग ठाणे के 58 वर्षीय मरीज के शरीर में प्रतिरोपित किया गया।

फोर्टिस अस्पताल में हृदय प्रत्यारोपण दल के प्रमुख डाक्टर अन्वय मुले ने मृतकों के अंगों को दान करने के बढ़ते आंकड़े को देखते हुए उम्मीद जताई कि इससे वे ऐसे मरीजों की और मदद करने में सक्षम होंगे जिनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया है और जिनका रोग अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

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