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देवीधूरा में खेला गया ‘पत्थर युद्ध’ बग्वाल

नैनीताल। रक्षाबंधन के पावन मौके पर जब देशभर में भाई की कलाई पर बहनें पवित्र राखी बांध रही थी, वहीं उत्तराखंड के देवीधूरा के लोग अपनी आराध्य देवी का पूजन एक दूसरे पर पत्थर मारकर ‘बग्वाल’ खेल रहे थे। इस बार बग्वाल आठ मिनट तक खेला गया और 2000 से अधिक रणबांकुरों ने इसे खेला और इस अद्भुत खेल के साक्षी एक लाख से अधिक श्रद्धालु बने।

उत्तराखंड के चंपावत जिले के देवीधूरा के ऐतिहासिक खोलीखांड मैदान में चार खामों के रणबांकुरों ने ऐतिहासिक बग्वाल खेला। मां बाराही धाम में सोमवार सुबह से ही बरसात रही। जिससे यहां के सभी कार्यक्रम प्रभावित हुए। बाराही धाम में मां के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया और यह सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। देवीधूरा के ऐतिहासिक मैदान के अलावा चारों ओर श्रद्धालुओं एवं बग्वालियों की भीड़ जुटी रही। करीब एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने देवीधुरा में मां बाराही के दर्शन किए।

बग्वाल के लिए प्रसिद्ध चार खामों के रणबांकुरों ने सुबह तड़के सबसे पहले मां बाराही मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद सभी खामों के रणबाकुरें सज-धजकर धीमे धीमे खोलीखांड दुर्वाचौड़ मैदान में इकट्ठा होने लगे। सभी खामों के लोग गाजे-बाजों के साथ मंदिर प्रांगण की ओर निकले। मंदिर के पुजारी ने दो बजकर 42 मिनट पर खेल की शुरूआत करने का इशारा किया खोलीखांड मैदान में इकट्ठा रणबांकुरों ने पहले फल एवं फूल हाथ में लेकर एक दूसरे पर फेंकने शुरू किये। फूल और फल फेंकने का सिलसिला दो मिनट तक चला उसके बाद पत्थर फेंकने शुरू हो गये। कुल आठ मिनट तक यह खेल खेला गया। इस दौरान लगभग 334 बग्वाली घायल हो गये। जिनमें से 154 का स्थानीय अस्पताल में तथा 180 लोगों को मंदिर परिसर में बने स्वास्थ्य विभाग के शिविर में उपचार किया गया।

बग्वाल खत्म होते ही सभी रणबांकुरे एक दूसरे के गले मिले और सभी ने एक दूसरे के सुख- समृद्धि की कामना की।

प्राचार्य भुवन चंद्र जोशी ने बताया कि बारिश के कारण बग्वाल थोड़ा देर से शुरू हुआ। कुमाऊं के साथ ही तराई एवं कई राज्यों से भी श्रद्धालु बग्वाल के लिए देवीधुरा पहुंचे। हजारों पर्यटकों ने भी बाराही धाम में बग्वाल मेले का मजा लिये।

निर्धारित कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बाराही धाम में आज शिरकत करनी थी लेकिन मौसम खराब होने के कारण मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उडान नहीं भर पाया। प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, विधायक राम सिंह कैड़ा और भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद बलराज पासी ऐतिहासिक बग्वाल के साक्षी बने।

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