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अर्जन सिंह: महानायक, सरल स्वभाव वाले एयर मार्शल

नई दिल्ली। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हारी बाजी को जीतने वाले भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह को देश एक सैन्य महानायक के रूप में याद रखेगा लेकिन उनके अपने बच्चों की नजर में वे एक बेहद सरल स्वभाव वाले इंसान थे और वे जानते थे कि एक इंसान की कद्र कैसे की जाती है।

उनके बेटे अरविंद और आशा अपने पिता को आज एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद करते हैं जो बेहद विनम्र स्वभाव के थे और सफाई कर्मचारी से भी उसी गर्मजोशी से बात करते थे जैसे अपने घर में आने वाले मेहमानों से। अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए अरविंद अमेरिका से आए हैं। वह कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता से ही सीखा था कि इंसानियत क्या होती है।

वह कहते हैं, अपने पिता के बारे में जो एक बात मेरे जेहन में हमेशा रहेगी, वो ये कि वह हमेशा बेहद विनम्र रहे। वह लोगों के साथ बहुत सम्मान के साथ पेश आते थे। यदि सफाई कर्मचारी भी मिल जाता तो वे उसे अपने बराबर का ही दर्जा देते थे और ये एक खास बात है जो मैंने उनसे सीखी।

98 साल की उम्र में शनिवार को अर्जन सिंह का निधन हो गया। अरविंद कहते हैं कि वह सही मायने में एक परोपकारी थे। सिंह ने बरार स्क्वेयर पर बताया, उन्हें तो महान बनना ही था। महानता उनकी नियति में लिखी थी। यहीं पर अर्जन सिंह का आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

उनकी बेटी आशा सिंह भी याद करती हैं कि भारतीय वायुसेना के महानायक कितने सरल और निश्छल स्वाभाव के थे और उन्हें किस तरह एक मामूली इंसान से बात करना अच्छा लगता था। आशा सिंह बताती हैं, वह हर किसी को बढ़कर खुद ही नमस्ते करते थे । चाहे कोई अच्छा अधिकारी हो या अच्छा नहीं भी हो तो भी वह उससे हमेशा बड़ी ही आत्मीयता से मिलते थे। वह उन लोगों को भी याद रखते थे जिनसे वह 50 -60 साल पहले मिले थे। वह मानती हैं कि उनके पिता का निधन बड़ा भारी नुकसान है।

वह कहती हैं, मेरे लिए यह बहुत बडा नुकसान है। वे एक महान इंसान थे और मेरे लिए एक प्रेरणा भी। मुझे इस बात की खुशी है कि वे इतिहास के पन्नों में सदा जिंदा रहेंगे। अर्जन सिंह की भतीजी मंदिरा बेदी याद करती हैं कि भारतीय वायुसेना के इतने बड़े अधिकारी होने के बावजूद वह अपनी उपलब्धियों के बारे में शायद ही कभी बात करते थे। वह बताती हैं, वो बड़े ही शानदार किस्से सुनाते थे। उन्होंने जिंदगी में इतना कुछ हासिल किया था लेकिन वे कभी अपने बारे में बात नहीं करते थे। वह हमेशा आपकी जिंदगी में दिलचस्पी दिखाते थे और आपके बारे में जानना चाहते थे।

अर्जन सिंह एकमात्र ऐसे अधिकारी थे जिन्होंने एयरफोर्स मार्शल का सर्वोच्च पद हासिल किया था। यह रैंक सेना के फाइव स्टार फील्ड मार्शल के बराबर होता है। वह एक अद्भुत पायलट थे जिन्होंने भारतीय वायुसेना को विश्‍व स्तर पर सर्वाधिक शक्तिशाली वायुसेनाओं में से एक बनाया।

 

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