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विश्व युद्ध में महिलाओं पर क्रूरता की कहानी

नई दिल्ली। मेटा थिएटर फेस्टिवल के तीसरे दिन रविवार को दो नाटकों का मंचन हुआ। रहांग चौधरी निर्देशित नाटक 'कम्फर्ट वीमेन-एन अनटोल्ड हिस्ट्री' असमी भाषा में था और इसका मंचन श्रीराम सेंटर में हुआ। यह नाटक दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी साम्राज्यवाद द्वारा महिलाओं के खिलाफ की गई क्रूरता को प्रदर्शित करता है, जो 1990 के दशक में दुनिया के लिए उनके दुखद रहस्य को सामने लाता है। इस नाटक में यह भी दिखाया है कि युद्ध हमेशा मानवता के सबसे दुखद सत्यों में से एक रहा है, न केवल सैनिकों को युद्ध के मैदानों पर शारीरिक रूप से पीड़ित होना पड़ता है बल्कि गहरे घावों को भी सहना पड़ता है।

मेटा थिएटर फेस्टिवल में रविवार को दूसरा नाटक मलयालम भाषा में ससिधरण नादुविल द्वारा निर्देशित 'हिगुइता: द गोअली एनक्सिएटी एट द पेनल्टी किक' का मंचन श्रीराम भारतीय कला केंद्र में हुआ। यह नाटक दिग्गज कोलम्बियाई गोलकीपर जोस रेने हिगुटा जपाटा की खेलने की शानदार शैली जैसे विभिन्न विषयों को उजागर करते हैं।

फेस्टिवल में सोमवार को भी दो नाटकों का मंचन होगा, पहला मणिपुरी भाषा में 'होंजांग टारेट' जिसका निर्देशन ओयसिस सौन्गेजम ने किया है, जिसका मंचन श्रीराम सेंटर में शाम 6 बजे होगा। शाम को 8 बजे मलयालम नाटक 'नोना' का मंचन कमानी सभागार में होगा। इस नाटक का निर्देशन जिनो जोशफ ने किया है।

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