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गांव की महिलाओं में आया यह बदलाव

भोपाल/रायसेन। कृष्णा (20) की गोदी में देवा (दो माह) गुमसुम सोया हुआ है। कृष्णा अपनी और बेटे की सेहत से पूरी तरह निश्चिंत है। वह कहती है कि जब गर्भवती थी तब आवश्यक सभी टीके लगवाए और अब बेटे को भी टीके लगवा रहे हैं ताकि, वह पूरी जिंदगी किसी गंभीर बीमारी की जद में न आए। 
मध्य प्रदेश की राजधानी को सागर से जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित है रायसेन जिला। इस जिले के सांची विकासखंड का गांव है सरार। इस गांव में कच्चे मकान के बाहरी हिस्से में बैठी कृष्णा पूरी तरह तंदुरुस्त हैं और दो माह के बेटे को भी किसी तरह की परेशानी नहीं है। कृष्णा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "वह आठवीं पास है और उसके पति पांचवीं तक ही पढ़े हैं, देवा उसकी पहली संतान है। उसे गांव की आशा कार्यकर्ता ने टीकाकरण के महत्व को बताया, तो उसने सभी टीके लगवाए और अब बेटे को भी सभी टीके लगवा रही है। गर्भस्थ होने के दौरान और प्रसव के बाद उसे किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत नहीं आई और बेटा भी स्वस्थ है।"

कृष्णा अकेली ऐसी महिला नहीं है जो टीकाकरण के महत्व को समझती हैं बल्कि, गांव-गांव में अनेक ऐसी कृष्णा हैं जो खुद तो टीकाकरण को प्राथमिकता दे ही रही है, साथ में दूसरों को प्रेरित भी कर रही हैं। इसी तरह जब बारला गांव में जाकर देखा तो वहां बड़ी संख्या में महिलाएं अपने दो साल से कम आयु के बच्चों को लेकर टीका लगवाने पहुंची थीं। उनके हाथ में मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड था, जिसमें टीकों का ब्योरा दर्ज होता है। यहां हेमलता लोधी अपनी बेटी को टीका लगवाने पहुंची थी, साथ में उनकी सास भी थी। वर्तमान में पूरे देश में जन्म से पांच वर्ष तक के बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण के लिए सघन मिशन इंद्रधनुष अभियान चलाया जा रहा है। राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. संतोष शुक्ला ने बताया कि राज्य के 17 जिले इस अभियान में शामिल किए गए हैं। यहां चार चरणों में यह अभियान चलाया जा रहा है। दो चरण पूरे हो चुके हैं, तीसरा चरण सात से 18 दिसंबर तक चल रहा है, चौथा और अंतिम चरण जनवरी में होगा।

सांची विकास खंड के अंबाड़ी गांव पहुंचे तो बाहरी हिस्से में एक मकान के बाहर चबूतरे पर टीकाकरण का अभियान चल रहा था। यहां उन बच्चों को टीका लगाए जा रहे थे जो किसी कारण से वंचित रह गए थे। यहां भोपाल से मायके आई माया अपने बेटे राज को लेकर यहां पहुंची थी। इसी तरह गांव से बाहर गई महिलाओं ने अपने बच्चों को दूसरे स्थान पर टीका लगवाने की फोन पर खबर दी। 

राज्य में वैक्सीन कोल्ड चेन के प्रभारी डॉ. विनीत श्रीवास्तव ने बताया कि विभिन्न केंद्रों से लेकर लाभार्थी तक वैक्सीन पहुंचने की लगातार निगरानी रखी जाती है। इसके लिए एक एप भी विकसित किया गया है, जिससे वैक्सीन को सुरक्षित रखने से लेकर उपलब्धता का ब्यौरा एक पल में हासिल किया जा सकता है। यूनिसेफ की डॉ. वंदना ने आईएएनएस से कहा, "महिलाओं को जब टीकाकरण के फायदे गिनाए जाते हैं कि उनकी संतान को डिप्थीरिया, टीबी, काली-खांसी, टिटनेस, हैपेटाइटिस, पोलियो, चेचक, दिमागी बुखार से बचाया जा सकता है। यह सुनते ही वे सहर्ष तैयार हो जाती हैं। वहीं आशा कार्यकर्ता, एएनएस और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी का बेहतर तरीके से निर्वहन कर रहे हैं।" राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है, प्रसव से लेकर उपचार तक में लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं, मगर महिलाएं अपनी और जन्म लेने वाले बच्चे की सेहत को लेकर बेहद संजीदा हैं। इस काम में टीकाकरण की जिम्मेदारी निभाने वाले अमले का उन्हें साथ मिल रहा है।

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