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शाकाहारी खुराक पर्यावरण के लिए बेहतर

लंदन। एक अध्ययन में सामने आया है कि विशुद्ध शाकाहार का सेवन पशु उत्पादों की तुलना में पृथ्वी के लिए बेहतर हो सकता है। ‘फ्रंटियर्स इन न्यूट्रीशन’ नाम के जर्नल में प्रकाशित हुआ यह अध्ययन पहली बार दोनों आहार पद्धतियों और खेती उत्पादन प्रणालियों के पर्यावरणीय प्रभावों की पड़ताल करता है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि यह पहली बार जैविक खाद्य सेवन के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की भी पड़ताल करता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन समेत कई संगठन वैश्विक स्तर पर अधिक टिकाऊ आहार को अपनाने की वकालत करते हैं। ऐसे आहारों में पशु उत्पादों कम उपभोग शामिल है। इसका पौधे आधारित उत्पादों की तुलना में पर्यावरण पर अधिक प्रभाव पड़ता है। यह मुख्य रूप से पशुधन की उच्च ऊर्जा आवश्यकताओं के साथ-साथ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में पशुधन के बहुत बड़े योगदान के कारण है। अत्यधिक पशुधन भी जैव विविधता के लिए हानिकारक है क्योंकि इससे प्राकृतिक पर्यावास को घास और फसलें उगाने में प्रयोग में लाया जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि खाद्य उत्पादन की विधि टिकाऊ आहार को प्रभावित कर सकती है। जैविक खेती को उत्पादन की अन्य तकनीकों की तुलना में आम तौर पर अधिक पर्यावरण अनुकूल समझा जाता है।
‘फ्रेंच एजेंसी डे इन्वायर्मेंट एट डी ला मैट्राइज़ डी एनर्जी एंड न्यूट्रीशनल एपीडेमोलॉजी रिसर्च यूनिट’ की लुइज सेकोडा ने कहा कि हम इस बात की अधिक विस्तृत तस्वीर प्रदान करना चाहते थे कि कैसे विभिन्न आहार पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। शोधकर्ताओं ने फ्रांस के 34,000 से ज्यादा वयस्कों से आहार सेवन और जैविक खाद्य सेवन के बारे में जानकारी हासिल की।

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