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चीता की आबादी को लेकर वैज्ञानिक चिंतित

वाशिंगटन। वैज्ञानिकों ने चीता को ‘लुप्तप्राय’ प्राणियों की सूची में शामिल किये जाने का सुझाव दिया है । यह सुझाव दक्षिण अफ्रीका में चीता की कम आबादी के प्रमाण पाये जाने के बाद पेश किया गया है। शोधार्थियों ने चीता की संख्या का व्यापक मूल्यांकन करने के बाद अंतरराष्ट्रीय यूनियन फॅार कंन्जरवेशन आफ नेचर (आईयूसीएन) की सूची में उन्हें ‘‘लुप्तप्राय’’ श्रेणी में सूचीबद्ध किया।
अध्ययन में पाया गया कि दक्षिण अफ्रीका में केवल 3,577 वयस्क चीते बचे हैं। यह आईयूसीएन के हालिया अनुमान से 11 प्रतिशत कम है। वैज्ञानिकों ने नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी के समर्थन से अपने अध्ययन में धारी वाले करीब बीस हजार चीतों को शामिल किया। अध्ययन में पाया गया कि 2010 से 2016 के बीच नाम्बीबिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका और जिम्बांबे के कुल 789,700 वर्ग किलोमीटर में मुक्त सीमा क्षेत्र वाले चीते मौजूद थे।
अमेरिका में ड्यूक विश्विविद्यालय के वर्षा विजय ने बताया, ‘‘यह धरती का वह क्षेत्र था, जहां मुक्त-सीमा क्षेत्र वाले चीते बचे थे। यह जानना महत्वपूर्ण है कि ‘लुप्तप्राय’ प्रजातियों के लिए उपयुक्त संरक्षण प्रबंधन योजनाओं को विकसित करने के लिये कितने चीता बचे हैं और वे कहाँ हैं।’’ शोध रिपोर्ट ‘पीर जे’ जर्नल में प्रकाशित है ।

इस अध्ययन में क्षेत्र में मौजूद चीतों की मौजूदा संख्या के बारे में ही नहीं बताया गया, बल्कि उन स्थानों की भी पहचान की गयी, जहां उनके जीवित बचे होने की संभावना हो, लेकिन इस अध्ययन के दौरान उन्हें वहां नहीं देखा गया। विजय ने कहा, ‘‘इस दुर्लभ एवं लुप्तप्राय प्रजाति को बेहतर ढंग से समझने के लिये हमें उनकी आबादी की पुष्टि और उनकी आबादी की निगरानी की जरूरत है।’’

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