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आरक्षण समाप्त करना नामुमकिन

सहारनपुर। जवाहर लाल नेहरू यूनीवर्सिटी के प्रोफेसर डा. विवेक कुमार ने आज कहा कि अनुसूचित जातियों और जन-जातियों के लिए संविधान में आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त नहीं किया जा सकता है। प्रो कुमार ने यहां आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुये कहा कि हिंसा और उग्र्र आंदोलन के जरिए कोई भी समाज या वर्ग अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता है।
सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भीम सेना की मौजूदगी और पिछले कुछ अरसे में उसके द्वारा जारी हिंसक आंदोलन पर प्रो कुमार ने कहा कि दलितों को हिंसा के मार्ग पर चलने से कुछ भी हांसिल नहीं होगा। उन्हें लोकतंत्र में दिए मताधिकार का विवेक पूर्ण ढंग से इस्तेमाल करना चाहिए। इसी से सत्ता और समाज बदलाव आ सकता है। किसी भी हिंसा और उग्रता को शासन-प्रशासन कानून सम्मत तरीके से आसानी से निपट सकता है।
उन्होने कहा कि डा. अंबेडकर की कोशिशों के कारण भारत की एकता और अखंडता बनी रही। ब्रिटिश शासन ने स्वतंत्रता से पहले देशी रियासतों को स्वतंत्र करते हुए भारत या पाकिस्तान के साथ जाने से छूट दे दी थी। लेकिन डा. आंबेडकर ने अंतर्राष्ट्रीय प्रेस कांफ्रेस कर ब्रिटिश सरकार की सोच को चुनौती देते हुए कहा था कि उसे ऐसा करने का कोई कानूनी और नैतिक अधिकार नहीं है। भारत एक सार्वभौमिक और गणतांत्रिक देश है। उसे इस तरह से विभाजित नहीं किया जा सकता। डा. साहब के इस कदम के बाद भारत सरकार ने सभी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कर लिया था। प्रो कुमार ने कहा कि 1935 में भारतीय रिर्जव बैंक की स्थापना भी डा. साहब के विचारों के आधार पर हुई थी। उन्होंने सरकारी दफ्तरों में काम करने के घंटे 12 से अाठ कर दिए थे। वेतन आयोग, टीएडीए का प्रावधान का भी अंबेडकर ही देन है।

पत्रकारों से बातचीत से प्रोफेसर कुमार ने कहा कि यदि संविधान को उसकी मूल भावनाओं के साथ लागू कर दिया जाता है तो उससे समाज के सभी तबको को न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि आजादी के 71 साल बाद भी सिस्टम पर एक जाति विशेष का ही वर्चस्व बना हुआ है। अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधियों को सत्ता में कही भी भागीदारी नहीं मिली हुई है। 

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