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मैक्स मामला: दूसरे बच्चे ने भी दम तोड़ा

नई दिल्ली। कुछ महीने पहले जब 25 वर्षीय आशीष कुमार को पता चला था कि वह पिता बनने वाले है तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था और उनकी खुशियां जल्द ही खत्म हो गईं। समय से पूर्व जन्मे जुड़वा बच्चों में से एक तो इस दुनिया को देख ही नहीं सका था और दूसरे बच्चे ने एक सप्ताह तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद आज दम तोड़ दिया जिससे कुमार की पत्नी को गहरा आघात पहुंचा है।
कुमार की पत्नी ने गत 30 नवम्बर को शालीमार बाग के मैक्स अस्पताल में जुड़वां बच्चों (एक लड़का और एक लड़की) को जन्म दिया था जो समय से पूर्व पैदा हुए थे लेकिन उन्हें सूचित किया गया कि दोनों बच्चे मृत पैदा हुए थे। अस्पताल ने इन नवजातों को एक पॉलीथिन बैग में डालकर उन्हें सौंप दिया था।
अंतिम संस्कार से कुछ देर पहले परिवार को पता चला कि एक बच्चे की सांसें चल रही हैं। बच्चे को पीतमपुरा के एक नर्सिंग होम ले जाया गया। लेकिन परिवार को आज एक और दुखद खबर मिली जब तड़के बच्चे ने दम तोड़ दिया। बच्चे के पिता कुमार ने लापरवाही के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए बच्चे का शव लेने से इंकार कर दिया है। कुमार ने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘मेरे साथ गलत हुआ है। पिता बनने की बजाय मुझे अपनी बेटी और अपने बेटे की मौत का दर्द सहना पड़ा, एक बार नहीं बल्कि दो बार। ऐसा लगा रहा है जैसे मेरे सिर पर पहाड़ टूट गया हो। लेकिन मैं अपने बेटे के शव को तब तक नहीं लूंगा जब तक दो डॉक्टरों को गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, ताकि हमें न्याय मिल सके।’’ राजस्थान के रहने वाले कुमार पश्चिम दिल्ली के नांगलोई क्षेत्र में एक दुकान चलाते है। कुमार पीतमपुरा में नर्सिंग होम के बाहर खड़े थे जबकि उनकी पत्नी की हालत सुधर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘ मेरी पत्नी वर्षा (21) अभी मैक्स अस्पताल में भर्ती है। वह अब भी कमजोर है और न्याय मिलने तक मैं अस्पताल से उसे लेकर नहीं जाऊंगा। मेरे परिवार के सदस्य वहां उसके साथ है।’’ कुमार ने आरोप लगाया कि इस घटना के लिए डाक्टर और अस्पताल अधिकारी जिम्मेदार है। इस भयावह घटनाक्रम को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमें पीले रंग की पालिथीन थैली में दो बच्चों के शव दे दिये गये। जब हम एक कार से अंतिम संस्कार के लिए बच्चों के शव लेकर जा रहे थे तो हमने उन्हें अलग अलग रख लिया। मैंने अपनी मृत बेटी को हाथों में लिया जबकि मेरे ससुर ने लड़के को हाथों में लिया। इसी दौरान लड़के के पैर चलते हुए पाये गये।’’ भावुक होते हुए कुमार ने कहा, ‘‘हम अंतिम संस्कार के लिए उन्हें ले जा रहे थे। भगवान की कृपा थी कि हमें यह पता चल गया कि वह जीवित है नहीं तो मैं एक पाप कर बैठता।’’ दिल्ली सरकार और मैक्स हेल्थकेयर ने इस मामले में अलग-अलग जांच के आदेश दिये है।
 

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