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जल विवाद विधेयक संसद में फिर पेश करेगी सरकार

नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों के बीच बढ़ते जल विवादों को देखते हुए सरकार ने अंतरराज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) विधेयक को संसद में फिर पेश करने का इरादा किया है और स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर आधिकारिक संशोधन संबंधी कैबिनेट नोट तैयार कर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि देश के कई प्रदेशों के बीच नदी जल के उपयोग को लेकर विवाद चल रहा है।

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में लोकसभा में पेश अंतरराज्यीय नदी जल विवाद संशोधन विधेयक 2017 पर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर और विधि एवं न्याय मंत्रालय के परामर्श के अनुसार, जल संसाधन मंत्रालय द्वारा इसमें किये जाने वाले आधिकारिक संशोधन संबंधी कैबिनेट नोट का मसौदा तैयार किया है। इसके अलावा मंत्रालय ने नदी बोर्ड अधिनियम 1956 में संशोधन के वास्ते नदी बेसिन प्रबंधन विधेयक 2018 का मसौदा भी तैयार किया है।

बहरहाल, मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंतरराज्यीय नदी जल विवादों के निपटारे के कार्य को सुचारू बनाने के क्रम में मंत्रालय द्वारा अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 को संशोधित करते हुए पिछले वर्ष मार्च में लोकसभा में अंतरराज्यीय नदी जल विवाद संशोधन विधेयक 2017 पेश किया था। विधेयक में स्थायी स्थापना, स्थायी कार्यालय परिसर और आधारभूत ढांचा सहित अधिकरण के गठन की परिकल्पना की गई है।

इसमें प्रत्येक जल विवाद के लिये एक अलग अधिकरण की स्थापना करने की बात कही गई है जो बहुत समय लगने वाली प्रक्रिया है। इसके बाद विधेयक को जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया था। स्थायी समिति ने अंतरराज्यीय नदी जल विवाद संशोधन विधेयक 2017 के संबंध में जल संसाधन संबंधी 19वीं रिपोर्ट के रूप में 11 अगस्त 2017 को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कीं।

अधिकारियों ने बताया, ‘‘इन सिफारिशों के आधार पर विधि एवं न्याय मंत्रालय के साथ परामर्श से जल संसाधन मंत्रालय ने उक्त विधेयक में आधिकारिक संशोधन संबंधी कैबिनेट नोट का मसौदा तैयार किया हैं।’’ इसे अब कैबिनेट की मंजूरी के लिये भेजा जायेगा।

उल्लेखनीय है कि देश के कई प्रदेशों के बीच नदी जल के उपयोग को लेकर विवाद चल रहा है। इनमें कावेरी विवाद तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे राज्यों के बीच है। सतलज-यमुना लिंक नहर विवाद पंजाब और हरियाणा के बीच है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश व कर्नाटक के बीच कृष्णा नदी के संबंध में तथा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा के बीच गोदावरी को लेकर और कुछ राज्यों के बीच नर्मदा नदी को लेकर समस्याएं हैं । जल संसाधन मंत्रालय ने अंतरराज्यीय नदियों और नदी बेसिन के नियमन एवं विकास के उद्देश्य से नदी बेसिन प्राधिकरण की स्थापना के लिये मौजूदा नदी बोर्ड अधिनियम 1956 में संशोधन के वास्ते नदी बेसिन प्रबंधन विधेयक 2018 तैयार किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि मसौदा विधेयक परामर्श के लिये सभी राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों को भेजा गया है। इसके अलावा आम लोगों से इस बारे में परामर्श के लिये इसे मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी किया गया है। समझा जाता है कि ब्रह्मपुत्र बराक तथा उत्तर पूर्व की अन्य अंतरराज्यीय नदियां, ब्रह्मणी वैतरणी बेसिन, कावेरी बेसिन, गंगा बेसिन, गोदावरी बेसिन, सिंधु बेसिन, कृष्णा बेसिन, महानदी बेसिन, माही बेसिन, नर्मदा बेसिन, पेन्नार बेसिन, सुवर्णरेखा बेसिन तथा तापी बेसिन के लिये नदी बेसिन प्राधिकरण गठित करने की बात है।

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