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कैलाश मानसरोवर यात्रा की उल्टी गिनती शुरू

नैनीताल। विदेश मंत्रालय की ओर से सोमवार को इस वर्ष की कैलाश यात्रा को हरी झंडी दिखाई जाएगी। 12 जून को यात्रा का आगाज शुरू हो जाएगा और पहला जत्था कैलाश के लिये रवाना हो जाएगा। भारत और चीन के बीच नब्बे के दशक से कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन किया जा रहा है। तब से लेकर दोनों देशों के बीच लगभग लगातार कैलाश यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यात्रा एजेंसी कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के महाप्रबंधक जीएस मर्तोलिया ने बताया कि निगम की ओर से यात्रा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। 12 जून से शुरू होने वाली यात्रा में इस बार सबसे अधिक 18 दल जायेंगे। प्रत्येक दल में अधिकतम 60 यात्री शामिल होंगे। यात्रियों को सोमवार को विदेश मंत्रालय की ओर से विधिवत् तरीके से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जायेगा। इसके साथ ही कैलाश यात्रा 2018 का आगाज होगा। यात्रा आठ सितम्बर तक चलेगी। अंतिम दल आठ सितम्बर को वापस दिल्ली पहुंच जाएगा।श्री मर्तोलिया के अनुसार तय कार्यक्रम के अनुसार पहले दल में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालु आठ जून को दिल्ली में एकत्र हो जाते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं के मेडिकल से लेकर सभी प्रकार के दस्तोवजी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया जाता है। 12 जून को सुबह पहला जत्था रवाना हो जाएगा। इसके साथ यात्रा का आगाज हो जाएगा।पहला दल 12 जून शाम को अल्मोड़ा पहुंच जाएगा। यात्रा का पहला पड़ाव अल्मोड़ा होगा। इससे पहले केएमवीएन की ओर से काठगोदाम स्थित टीआरसी में श्रद्धालुओं का परंपरागत तरीके से भव्य स्वागत किया जाता है। निगम के साहसिक पर्यटन प्रबंधक जी.एस. मनराल के अनुसार यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालु उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ ले सकेंगे। अगले दिन श्रद्धालु धारचूला अगले पड़ाव के लिये रवाना हो सकेंगे।उन्होंने बताया कि धारचूला कैलाश यात्रा का अंतिम बेस कैम्प होगा। यहां से श्रद्धालु लखनपुर तक वाहन से सफर कर सकेंगे और उसके बाद यात्रा का पैदल सफर शुरू हो जाएगा। श्री मनराल के अनुसार इस बार केएमवीएन ने कैलाश यात्रियों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराने की योजना बनायी है। श्रद्धालु अपने पहले पैदल पड़ाव बूंदी में ठेठ ग्रामीण संस्कृति से परिचित होंगे। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यहां होम स्टे योजना को मूर्त रूप दिया है। यहां कैलाश यात्री ग्रामीण परिवेश का दीदार कर सकेंगे। ग्रामीणों द्वारा तैयार घरों में रहेंगे और पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद ले सकेंगे।इसके अगले दिन यात्री अगले पैदल पड़ाव गुंजी के लिये रवाना हो जाएंगे। यहां यात्रियों को एक दिन आराम दिया जाता है। यहां से यात्री अति ऊंचाई वाले इलाके की ओर रवाना हो जाते हैं। 24 दिन की कठिन तपस्या के बाद यात्रियों की परिक्रमा पूरी हो पाती है।

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