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श्रद्धालुओं ने ब्रह्मसरोवर में लगाई श्रद्धा की डुबकी

कुरुक्षेत्र। सोमवती अमावस्या पर ब्रह्मसरोवर पर हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा की डुबकी लगाई। सूर्याेदय के साथ ही स्नान आरंभ हो गया था। अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनके निमित पिंडदान कर दान पुण्य किया। लक्ष्मी नारायण मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी हरिनारायण गिरी ने बताया कि पवित्र ब्रह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर में अमावस्या पर स्नान व दान का विशेष महत्व है।

सोमवती अमावस्या पर तो यह महत्व और भी बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या पर पवित्र ब्रह्मसरोवर में देशभर के पवित्र तीर्थो, तालाबों व नदियों का जल मिल जाता है। यहां पर स्नान कर दान करने से सभी तीर्थो पर स्नान करने का फल प्राप्त होता है। यहां किया गया दान 13 दिन तक 13 गुणा बढ़ता है। रविवार रात को ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र ब्रह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर पर पहुंचना आरंभ हो गए थे।

रात भर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा। सुबह सूर्योदय के साथ ही पवित्र ब्रह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर में स्नान आरंभ हो गए। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों में स्नान कर सूर्य देव को नमन किया और अपने परिवार के सुख की कामना की।

श्री गुरुधाम संस्कृत वेद विद्या पीठम् अनुसंधान ट्रस्ट के आचार्य राजेश वत्स ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार अमावस्या पर पवित्र ब्रह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर पर अपने पितरों के पिंडदान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, जिसके चलते श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों के किनारे पिंडदान किए। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा-अर्चना की।

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