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अरे! विकास गांडो थायों-पगला गयो!

अरूण जेटली ने ठीक कहा कि कांग्रेस में दम नहीं है जो इतना मारक केंपैन चलवा दे। अब यह बात गुजरात के भाजपाईयों को जंची या नहीं यह पता नहीं। मगर वे करे भी क्या?  वे तो कई दिनों से हैरान-परेशान हैं। गुजरात से कभी विकास की गूंज उठी थी, नरेंद्र मोदी चमके थे अब ठीक उलटी गूंज है। विकास को पागल करार दे लोगों में शोर है बचो इससे!  घर-घर हल्ला है कि विकास गांडो थायों छे! विकास पगला गया। लोगों के धंधे खा गया। सड़कों में गड्डे बना गया। नौजवानों को निठल्ला बना दिया। कंपनियों के ताले लगवा दिए। बैंको को दिवालिया बना दिया। लोगों को कड़का बना दिया। फसलों को चाट गया। किसानों को कर्जों में डुबो गया। पुल टूटे हुए तो पटरिया डुबी हुईं। जो बना हुआ था वह बिगड़ गया, बिखर गया क्योंकि विकास गांडो थायों छे! 

सोचें कितना मारक है सोशल मीडिया में वायरल हुआ यह केंपैन। तभी दिल्ली में कांग्रेसियों की साजिश से उपजी हुई बात नहीं हो सकती यह। ऐसे फेंकू तो गुजराती ही होते हंै। एक एक्स्ट्रीम से दूसरे एक्स्ट्रीम तक! गुजराती दिमाग की उर्वरता है जिसमें कभी विकास के हल्ले से पूरे देश को पागल बना दिया और अब विकास को पागल करार दे कर हंसा भी रहे हंै रूला भी रहे हंै और दूसरों को रोने के लिए कह रहे हंै। अपना मानना था और है कि विकास, धंधे, पैसे की समझ, उसकी भूख की तासीर में क्योंकि गुजराती नंबर एक हैं इसलिए देश में वे ही इस बात को ज्यादा बारीकी से जान-समझ सकते हैं कि विकास का आज क्या मतलब है? विकास ने निर्माण का फावड़ा पकड़ा हुआ है या उस्तरा लिए गले-जेब काट दे रहा है। 

कोई संदेह नहीं कि आज जब नवरात्रि के गरबा से गुजराती नाचने-गाने-झूमने की मस्ती में होगें तो लोगों के जहन में, लोगों की भीड़ में झूमने वाले झूमते हुए मजाक करेंगे कि गांडो थायों छे!  

गांडो ना थायों छे के प्रतिवाद में यों प्रदेश भाजपा नेताओं याकि नरेंद्र मोदी, अमित शाह से ले कर मुख्यमंत्री विजय रूपानी, नीतिन पटेल, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जीतू वागानी, भरत पांड्या ने अपने –अपने ढंग से जितना दम लगाना था लगा दिया। तभी अरूण जेतली ने बतौर गुजरात प्रभारी मंगलवार को गुजरात के पार्टी पदाधिकारियों को हड़काते हुए कहा भला तुम लोगों ने क्यों सोशल मीडिया के इस वायरल पर बोला? तुम लोग बोले तभी घर-घर बात पहुंची। जान ले सोशल मीडिया के इस हल्ले का जवाब देने के लिए मुख्यमंत्री विजय रूपानी, उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल, गुजरात भाजपा अध्यक्ष जीतू वाघानी सभी सभाओं में, जनता के खूब बोले है। पर ये बोले तो उसकी क्लिपिंग को ले कर भाई लोगों ने और मजाक उड़ाया कि विकास गांडो थायों छे! तभी बाद में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी कॉडर से कहां सोशल मीडिया से सावधान रहों तो मंगलवार को चुनावी तैयारियों का जायजा लेने गांधीनगर पंहुचे प्रभारी मंत्री अरूण जेतली ने पदाधिकारियों को हडकाते हुए कहा कि विकास गांडो थायों छे के वायरल के फेर में क्यों पडे! इसे नजरअंदाज करना था। तुम लोगों को गुजरात में 22 साल में हुए काम की, नरेंद्र मोदी की एनडीए सरकार की उपलब्धियों की चर्चा करनी चाहिए न कि विकास गांडो थायों छे पर!

कहते है विकास गांडो थायों छे की पहली पोस्ट बारिश से पूरी सड़क पर बने गड्डो के फोटो से वायरल हुई थी। मतलब देखों विकास ऐसे पगलाया कि सड़क के यह हाल है।  देखों पटरियां डुबी हैं, पुल टूटे हुए हंै, पेट्रोल-डीजल भाग रहा है, बेरोजगारी बढ़ रही है क्योंकि विकास गांडो थायों छे! 

यू ट्यूब पर छोटी फिल्मों, सोशल मीडिया पर तस्वीरों के हवाले या दोस्तों- घर परिवार की आम चर्चा में गुजराती मानस ने विकास और नरेंद्र मोदी का मजाक उडाने की जो कल्पनाशीलता, उर्वरता दिखलाई है वह इसलिए गौरतलब और अनहोनी है कि गुजरात में भला विकास का ऐसा मजाक! 

यह वहा टाइमपास की आज नंबर एक चर्चा है। छोरे- छोरी, लड़के-लडकियों के मजाक, मघ्यवर्ग के घर परिवार की चर्चा के यू ट्यूब पर ऐसे-ऐसे वीडियों चले है कि उनकी तादाद से तो लगेगा कि गुजरात में मनोरंजन का शायद इस समय प्रिय नारा है - विकास गांडो थायों छे!  

जब सब तरफ चर्चा है तो भाजपा की चुनाव तैयारी में भला क्यों न चर्चा हो? तभी एक अंग्रेजी अखबार ने मंगलवार को अरूण जेतली की पदाधिकारियों की बैठक की खबर के साथ जो ब्यौरा दिया है उससे उनकी भी इस पर चर्चा करना मालूम हुआ। जाहिर है उन्होने खुद जतला दिया कि मामला कितना गंभीर है। 

लाख टके का सवाल है कि नरेंद्र मोदी के विकास का मजाक उड़ाने वाला वायरल भला गुजरात में कैसे चला है? कांग्रेस और विपक्ष की तो औकात नहीं जो ऐसा मारक कैंपेन चलवा दे। 

तब क्या इसे जनता का मूड माने?  यदि जनता पागल हो कर विकास को पागल मानने लगी है तो इसका क्या अर्थ निकले? सोचे जो भाजपा सोशल मीडिया की मास्टर है। नरेंद्र मोदी- अमित शाह की भक्त सोशल मीडिया लंगूर फौज से जब सब त्राही करते है तो उससे पार पा कर आम गुजराती ने अपनी फीलिंग से यह नारा ऐसे कैसे वायरल करा दिया?  एक के बाद एक सब इसकों क्यों पक़ड़ते गए?  एक अर्थ बनता है कि विकास गांडो थायों छे जनता के मन की बात है। नरेंद्र मोदी के प्रदेश छोडने के साढे तीन साल के भीतर ही कथित विकास म़ॉडल की गुजरात में कलई उतरी हुई है। अन्यथा सड़कों पर गड्डे क्यों दिखे? लड़के-लड़कियां अपनी बेरोजगारी के मजाक को विकास गांडो थायों छे में क्यों गुथे हुए है? 

संभव है हार्दिक पटेल एंड टीम ने यह क्रिएटिवीटी दिखाई हो। गुजरात में नौजवान आबादी कम नहीं है। वह कैसी हताशा में है यह हार्दिक पटेल के अचानक फूटे विस्फोट से भी झलकी थी तो अब विकास गांडो थायों छे से भी झलक रही है। 

अपने लिए अकल्पनीय बात है कि गुजराती लोग सोशल मीडिया की क्रिएटीविटी में राजनीति पर ऐसा कटाक्ष पैदा कर सकते है! वे तो विकास, धन के पुजारी है तब गांडो थायो छे क्यों? 

क्या इसका राजनीति या विधानसभा चुनाव में मतलब होगा?  यह संभव नहीं लगता। इसलिए कि नरेंद्र मोदी-अमित शाह चुनाव को चुनावी बिसात बिछा कर लडते है। वोटों की असेंबली लाईन बना कर चुनाव लडने का मेकेनिज्म है। देखिए, सोशल मीडिया पर इधर विकास गांडो थायों छे चल रहा था उधर प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री का रोड शौ करा दिया। श्राद्व पक्ष के बावजूद बुलैट ट्रैन भी दौड़ी तो नर्मदा बांध का नया लोकार्पण भी हुआ। शंकर सिंह वाघेला का तीसरा फ्रंट बना है तो आप भी चुनाव में उतर रही है। उधर कांग्रेस को वैसे ही दस तरह से कसा हुआ है। इसलिए चुनाव का मसला और जनता में वायरल हुआ नारा अलग-अलग मामले है। बावजूद इसके अपने आपमें यह कम दिलचस्प नहीं है कि जिस प्रदेश से विकास की गूंज देश ने सुनी वहां से अब सुना जा रहा है- विकास गांडो थायों छे!

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