Loading... Please wait...

उफ! कश्मीर पर भी ढुलमुल

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीनगर जा कर वहीं बोला जो महीने पहले महबूबा मुफ्ती को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था। उन्होने तब मुख्यमंत्री को भरोसा दिया था कि सुप्रीम कोर्ट में कश्मीर के खास दर्जे से जुड़े अनुच्छेद 35ए को लेकर चिंता नहीं करें। सरकार कश्मीरी लोगों की भावनाओं के खिलाफ काम नहीं करेगी। उसी भरोसे को श्रीनगर जा कर अब गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दोहराया है। इससे कश्मीर घाटी के नेताओं का गदगद हो उछलना स्वभाविक है। तब मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घाटी में मैसेज दिया था कि देखो वे प्रधानमंत्री से भरोसा ले कर लौटी हंै अब राजनाथ सिंह के बयान पर उमर अब्दुल्ला यह कहने से नहीं चूके कि केंद्रीय गृह मंत्री का बयान महत्वपूर्ण है। उनका आश्वासन 35-ए के खिलाफ उठ रही आवाजों को बंद करने में मदद करेगा। 

सवाल है क्या इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो टूक स्टेंड माना जाए कि जम्मू-कश्मीर की धारा 370, अनुच्छेद 35 ए पर उनकी सरकार का वही रूख रहेगा जो कांग्रेस की सरकारों का था? 70 सालों में कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर को जैसे हैंडल किया उसी रीति-नीति पर केंद्र की भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी काम कर रहे है और करेंगे। यदि ऐसा है तो सुप्रीम कोर्ट में वह क्या कहेगी कि वह अनुच्छेद 35 ए की निरंतरता के पक्ष में है? ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट में कुछ सुधी जनों ने अनुच्छेद 35 ए को इस दलील पर चुनौती दी है कि एक देश दो संविधान नहीं चलेगा। शेष भारत के लोग जम्मू-कश्मीर में या जम्मू-कश्मीर में गए बाहर के लोग वहां संपत्ति आदि का अधिकार न लिए हुए हो तो यह क्या वैधानिक है? 

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ज्योंहि नोटिस दिया, सुनवाई शुरू की तो जम्मू-कश्मीर के उग्रवादी, अलगाववादी और खास दर्जे की मलाई खाने वाले नेताओं का शोर हुआ कि हम इसे बरदास्त नहीं करेंगे। मतलब सुप्रीम कोर्ट ने एक संवैधानिक सवाल पर सुनवाई शुरू की नहीं कि मुख्यमंत्री मेहबूबा और विपक्ष के अब्दुल्ला परिवार सहित घाटी के सभी नेता उठ खड़े हुए और शोर करने लगे! 

सवाल है क्या भारत के सुप्रीम कोर्ट को विचार करने का, याचिका पर सुनवाई, बहस, फैसला देने का हक नहीं है? उमर अब्दुला यहां तक बोल गए कि अनुच्छेद 35 ए पर विचार करना भारत में जम्मू-कश्मीर के विलय पर पुर्नविचार है। उनका यह बयान तब आया जब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर अपना यह गोलमोल स्टेंड लिया कि इस मसले पर व्यापक बहस होनी चाहिए। 

हिसाब से मोदी सरकार का दो टूक स्टेंड होना था कि हां, सुप्रीम कोर्ट इसकी संविधानसम्मता पर विचार करके फैसला दे। या यह कि खुद केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे, विशेष अनुच्छेद के पक्ष में नहीं है।

क्या ऐसा होना भाजपा-संघ के 70 साला प्रलाप का निचोड़ नहीं होता? नरेंद्र मोदी- अमित शाह की राष्ट्रवादी हिंदू सरकार भी एक राष्ट्र में दो संविधान की व्यवस्था के खिलाफ क्या दो टूक स्टेंड नहीं ले सकती? मगर सुप्रीम कोर्ट में उसने यह कह कर पल्ला झाड़ा कि इस पर व्यापक बहस होनी चाहिए। 

चलिए माना जाए कि व्यापक बहस हो। तब भाजपा को, सरकार को क्या खुद अपनी तरफ से अपना स्टेंड बता कर बहस को आगे नहीं बढ़ाना था? सार्वजनिक तौर पर भाजपा के लिए यह कहने में क्या हर्ज है कि हां वह  अनुच्छेद 35 ए के पक्ष में नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री मेहबूबा से बात करते हुए या गृह मंत्री राजनाथसिंह को श्रीनगर में बोलते हुए क्या नहीं कहना चाहिए था कि 70 साल के अनुच्छेद 35 ए के अनुभव सही नहीं हंै और पूरे देश में यदि इस पर विचार की जरूरत कईयों को समझ आती है तो जम्मू-कश्मीर के लोग भी बहस करें, सोचें कि अनुच्छेद 35 ए से क्या हासिल हुआ? यहां के लोग मुख्यधारा से जुड़े या अलगाव फैला? 

सोचें इस पूरे मसले पर सरकार का रूख क्या रहा?  सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में उसने अपना स्टेंड नहीं बताया। न ही यह कहा कि सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देगा वह सभी के लिए मान्य होगा। चिंता है, विरोध है तो सुप्रीम कोर्ट में जा कर बहस करें। जाहिर है पहले तो सरकार ने अपने को तटस्थ बनाया। फिर मुख्यमंत्री के जरिए प्रधानमंत्री ने मैसेज दिया कि चिंता न करें अनुच्छेद 35 ए के साथ कुछ नहीं होगा। और सोमवार को गृहमंत्री ने श्रीनगर में घोषणा कर दी कि सरकार कश्मीरी लोगों की भावनाओं के खिलाफ जा कर कोई काम नहीं करेगी।

क्या यह सब केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट को भी मैसेज देना नहीं है कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वहां के लोगों की भावना से जुड़ा हुआ है। वह यथास्थिति रखें।

और सोचे यदि सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि अनुच्छेद 35 ए वैधानिक, संविधान सम्मत है तब तो हमेशा के लिए जम्मू-कश्मीर की धारा 370, अनुच्छेद 35 ए का अलगाव शेष भारत को स्थाई तौर पर झेलते रहना होगा। क्या संघ परिवार, भाजपा और मोदी सरकार अपने राज में यह पुख्ता बंदोबस्त बनवा देना चाहते है कि कश्मीर घाटी के लोग हमेशा अलग पहचान के साथ आजादी की बात करते रहे? 

या यह माने कि सुप्रीम कोर्ट का अंततः फैसला अनुच्छेद 35 ए को अवैधानिक बताने वाला होगा। इसे ही सोचते हुए शायद सरकार शातिर भाव यह रूख अपनाए हुए है कि हम तो कश्मीरी लोगों की भावना की फिक्र करने वाले है मगर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया तो हम कुछ नहीं कर सकते। 

पर ऐसा है तो यह 56 इंची राष्ट्रवादी सरकार के लिए शर्मनाक इसलिए है क्योंकि राष्ट्र-राज्य की नियति मुंह पर राम, बगल में छुरी की रीति-नीति से नहीं बना करती। न ही इससे समस्या का स्थाई समाधान निकलना है। कश्मीर घाटी का क्या मतलब है, 70 सालों का क्या अनुभव है यह केंद्र सरकार, भाजपा और संघ परिवार, नरेंद्र मोदी, राजनाथसिंह सब जानते है। ये भी यदि ढुलमुल रहे तो होगा क्या? 

इस पूरे मामले में एक और बात निकलती है। अलग-अलग जगह, अलग-अलग जमात में एक ही मसले पर अलग- अलग बात करके भ्रमजाल बनाना लगता है सरकार की राज शैली बनी है। कही कुछ कहेंगे और करेंगे कुछ और या एक नेता धमकाएं और दूसरा उदारवादी बने यह सब सियासी दावंपेंच में भले ठीक माने मगर जम्मू-कश्मीर जैसे मसले में भी यदि ऐसा हुआ तो फिर क्या होगा, सोच सकते हैँ।

Tags: , , , , , , , , , , , ,

234 Views

बताएं अपनी राय!

हिंदी-अंग्रेजी किसी में भी अपना विचार जरूर लिखे- हम हिंदी भाषियों का लिखने-विचारने का स्वभाव छूटता जा रहा है। इसलिए कोशिश करें। आग्रह है फेसबुकट, टिवट पर भी शेयर करें और LIKE करें।

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

आगे यह भी पढ़े

सर्वाधिक पढ़ी जा रही हालिया पोस्ट

भारत ने नहीं हटाई सेना!

सिक्किम सेक्टर में भारत, चीन और भूटान और पढ़ें...

बेटी को लेकर यमुना में कूदा पिता

उत्तर प्रदेश में हमीरपुर शहर के पत्नी और पढ़ें...

पाक सेना प्रमुख करेंगे जाधव पर फैसला!

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय और पढ़ें...

अबु सलेम को उम्र कैद!

कोई 24 साल पहले मुंबई में हुए और पढ़ें...

© 2016 nayaindia digital pvt.ltd.
Maintained by Netleon Technologies Pvt Ltd