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अमेरिकी मोदी से वीजा भीख मागेंगे!

मंगलवार को अमित शाह ने गुजरात जीतने के सूत्र बताए। उन्होने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जीतू वधाणी के नामांकन के बाद आम सभा में बार-बार कांग्रेस पर जातिवादी-वंशवादी राजनीति का आरोप लगाया। कहा कि कांग्रेस का मतलब नरेंद्र मोदी का विरोध है। कांग्रेस बिना मुद्दे के है तो भाजपा विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। इसमें जातिवाद का मसला हार्दिक पटेल के हल्ले पर भाजपा का कांग्रेस को घेरना है। यह जतलाना है कि कांग्रेस हिंदू समाज को बांट रही है और उसका एजेंडा हिंदू रक्षक नरेंद्र मोदी का विरोध है। अलग-अलग वीडियों से हिंदू समाज में खौफ, चिंता पैदा करना जहां एक पहलू है वही नरेंद्र मोदी के होने से दस तरह से भारत की जीत है यह भी प्रचारित है। फिर यदि नरेंद्र मोदी हारे तो क्या होगा, भारत क्या सुरक्षित रह पाएगा, इस बात को भी लोगों के जहन में उतारा जाने लगा है। अमित शाह ने नरेंद्र मोदी का बार-बार जिक्र किया। और इस सप्ताह जब मोदी खुद प्रचार में उतरेगें तो उनसे अपने आप यह मैसेज बनेगा ही कि टहूं नरेंद्र मोदी छू, हूं गुजरात छू, हू भारत छू!

कई मायनों में नरेंद्र मोदी से भारत, मोदी से गुजरात, मोदी से हिंदू, मोदी से विकास का हल्ला 2017 के भारत की पहचान है। यह नरेंद्र मोदी की कला है, जादू है, प्रचार का कमाल है जो हर बात आज उनके दरवाजे पर जा कर खत्म होती है। अमित शाह ने कल के भाषण में सर्जिकल स्ट्राइक की याद कराई तो इंडियन एक्सप्रेस में आज छपी एक रपट में आनंद जिले के किसान ने कहा - देखों, मोदीजी ने कैसे डोकलाम में चीनियों को सबक सीखाया। उन्हे अपने सैनिक हटाने पड़े। यहां तक कि डोनाल्ड ट्रंप भी उनके दोस्त हंै। भारत को ले कर क्या बोले हैं। दूसरे किसान रोहितभाई ने कहा- यदि मोदी ने 25 साल राज किया तो अमेरिका के लोग भीख मांगेगे भारत के वीसा के लिए! 

यदि एक किसान डोकलाम की बात कर रहा है तो अंतरराष्ट्रीय अदालत के लिए भारत के उम्मीदवार की जीत, ब्रिटेन की हार का श्रेय भी नरेंद्र मोदी को ही मिलेगा। भारत का हर दिन अब घटना है और वह मीडिया के जरिए नरेंद्र मोदी की शान बनवाने वाली है तो आम मतदाता क्यों न प्रभावित हो। जब अंग्रेजीदा कथित समझदार अखबार भी एक जज को चुनने की सामान्य बात को भी भारत की जीत, महाशक्ति ब्रिटेन की हार में देखते हंै तो गुजरात का किसान तो हर दिन नरेंद्र मोदी से लगातार भारत के जीतने की खबरे 17 साल से सुन रहा है। ऐसे में उसका यह सोचना ठीक ही है कि भारत जीतते-जीतते इतना जीत जाएगा कि अमेरिकी भूखे-नंगे हो कर 25 साल बाद भारत में नौकरी के लिए वीजा मांगेगें!

बूझ सकते हंै सूचनाओं, बहस, विमर्श और नैरेटिव ने नरेंद्र मोदी की गुजरात के गांव में डोनाल्ड ट्रंप से बड़ी वैश्विक इमेज बनवा दी है। तब चुनाव उनकी धुरी पर लड़ा ही जाना है। उसके आगे वह जातिवादी राजनीति भला कैसे क्लिक हो सकती है जो गुजरात में कांग्रेस पर चस्पां हो रही है। इस चुनाव में याकि अमित शाह के मंगलवार के भाषण में नई बात कांग्रेस पर जातिवादी हमले की है। यह इसलिए क्योंकि कांग्रेस जातिवादी संगठनों से जुड़ी नजर आ रही है। हार्दिक, जिग्नेश, अल्पेश की जिस तिकड़ी से कांग्रेस बम-बम है उसे ही नरेंद्र मोदी-अमित शाह चुनाव में मुद्दा बना कर हिंदुओं को याद दिलाएगें कि कांग्रेस ने पहले भी ऐसे मुसलमानों के साथ मिलकर खाम राजनीति की थी। हार्दिक का हल्ला गैर-पटेलों में कांग्रेस के प्रति चिढ़ बनवाए यह भाजपा की चुनावी रणनीति में नंबर एक कोशिश है। 

उस नाते हूं मोदी छू,  या मोदी छे या ‘हूं गुजरात छू, हूं विकास छूं’ के नारे पिछले तीन विधानसभा चुनावों की पुनरावृति है। मगर जातिवाद एंगल नया है। इससे इस दफा हिंदू बनाम मुस्लिम के साथ पटेल बनाम गैर-पटेल जात गौलबंदी की भी कोशिश होगी।  

ध्यान रहे गुजरात 1995 से भाजपा के पास है। किसी एक पार्टी का 22 साला राज मामूली नहीं होता। प्रदेश में भगवा राज की नींव संघ-जनसंघ के तपस्वी- कर्मठ स्वंयसेवकों की फौज से बनी थी। मकरंद देसाई, केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला जैसे नेताओं की दशकों की मेहनत ने भगवा जमीन बनवाई लेकिन उस पर हल बार-बार लगातार कांग्रेस की मूर्खताओं से चला। 

कोई माने या न माने अपना मानना है कि गांधी के प्रदेश में गांधीवादियों- सेकुलरवादियों की बदौलत वे स्थितियां बनी जिससे जनसंघ-भाजपा में गुजरातियों को अपनी सुरक्षा समझ आई। तमिलनाडु की लगातार द्रविड राजनीति या बंगाल में चले लंबे लेफ्ट राज से गुजरात की तुलना इसलिए अलग बनती है क्योंकि लौकतंत्र में धर्म आधारित सुरक्षा की चाहना दो दशक बाद भी एक प्रदेश में बरकरार रहे तो उसमें असुरक्षा की गहराई कितनी गहरी होगी, इसे बूझना असंभव है। भला इस बात का क्या जवाब है कि नरेंद्र मोदी 2002 में भी गुजराती हिंदुओं के लिए सुरक्षा के पर्याय थे और आज भी है? 

नरेंद्र मोदी ने बतौर मुख्यमंत्री और अब बतौर प्रधानमंत्री गुजरात में यह बात पैंठा रखी है कि ‘हूं मोदी छूं! इसमें कोर तत्व उनसे सुरक्षा है। इसके बाद जुड़ेगी गुजरातियों की आन, बान, शान की बाते। आज के इंडियन एक्सप्रेस में आनंद जिले की चुनावी रपट से और झलका है कि गुजराती हिंदू पहले मोदी से प्रदेश में अपनी सुरक्षा बूझता था और अब दिमाग में डोकलाम में चीन से सुरक्षा भी मान बैठा है। क्या यह कुल मिला कर नरेंद्र मोदी की हिंदू नब्ज पर पकड के चलते नहीं है? सोचे आनंद जिले का पटेल किसान परिवार। वह मुसलमानों से रक्षा सोचते-सोचते डोकलाम में चीन से देश की रक्षा तक सोचने लगा है तो ये बाते उसकी जहन में उमड़ी हुई होंगी कि हूं मोदी छूं! हूं गुजरात छू, हूं भारत छूं, हूं विकास छू! हू सुरक्षा छू! 

तब हूं राहुल गांधी छू, का गुजरातियों के मनोभाव में क्या असर हुआ पडा होगा? शायद इसका जवाब कांग्रेस के पास भी नहीं होगा। इसलिए कि वे कोई नरेंद्र मोदी से प्रतिस्पर्धा करते हुए, कुश्ती लड़ते नेता नहीं है। वे लड़ते दिख रहे हैं हार्दिक, अल्पेश, जिग्नेश की बदौलत। कांग्रेस और राहुल गांधी लड़ाई में नहीं है लड़ाई होती लग रही है तो गुजरात की नई पीढ़ी, युवा नौजवानों के चलते। 

क्या ये नौजवान मोदी-शाह की साम-दाम-दंड-भेद की रणनीति को, उनकी अनुभवी चुनावी समझ को पंचर कर सकते हैं? अपने को समझ नहीं आया कि जिस जातिवाद को भाजपा मुद्दा बना रही है उस जातिवाद की लीडरशीप 20-25 साल के लड़को के हाथ में कैसे है? हिसाब से पटेल, ओबीसी और दलित तीनों समूह बड़े हंै। इनमें पुराने-पके नेताओं की लीडरशीप का नहीं ऊभरना और नए लड़को की हवाबाजी होना चौंकाता है। कही सारा मामला थोथा चना बाजे घना वाला तो नहीं? सोशल मीडिया में इन लड़कों ने भले मनभावन, लोगों की नब्ज को छूने वाले विकास गांडो थायों छे का कैंपेन चलाया हो लेकिन वह क्या बूथ लेवल पर भी हलचल लिए हुए होगा?  क्या हूं नरेंद्र मोदी छू, हूं गुजरात छू, हू विकास छू! का प्रतिवाद हार्दिक, अल्पेश, जिग्नेश के पास है?

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