इतना आरडीएक्स कैसे आया?

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सतपाल मलिक ने अब तक के सबसे बड़े आरडीएक्स विस्फोट याकि पुलवामा आतंकी हमले के बाद दो टूक शब्दों में लापरवाही, खुफिया चूक की बात कही। इसका अर्थ है कि यदि चाहते, चुस्त रहते तो आतंकी पहले पकड़े जा सकते थे। इसका यह भी अर्थ है कि सीमा पार से बोरे भर आरडीएक्स लाना, उसमें आईईडी लगाने वाले विशेषज्ञ आंतकी की आवाजाही के तथ्य लापरवाही या जान बूझकर अनदेखी की बदौलत हैं। तब सवाल है ऐसा क्या मोदी-डोवाल की केंद्रीय खुफिया मशीनरी के स्तर पर हुआ या श्रीनगर में सुन्नी बहुल पुलिस-खुफियाई मशीनरी ने पुलवामा होने दिया? तब भारत को, केंद्र सरकार को सर्वप्रथम देश के भीतर के उन लोगों को तलाशना चाहिए या नहीं, जिन्होंने लापरवाही या जान बूझकर नियंत्रण रेखा की तमाम खुफिया चौकसी के बावजूद बोरों भरा आरडीएक्स भारत में आने दिया? शुक्रवार को नरेंद्र मोदी  ने यवतमाल में गलत नहीं कहा कि – ‘आंसू का पूरा पूरा हिसाब लिया जाएगा’। मगर साथ में राज्यपाल मलिक की बात का नोटिस लेते हुए कहना था, माफी मांगनी थी कि माफ करें लापरवाही हुई!  

हां, हर भारतीय को, शहीद जवान के हर परिवार से पहले माफी मांगनी चाहिए कि लापरवाही हुई। भारत राष्ट्र-राज्य को पहले जानना है कि हम इतने बड़े आतंकी हमले को रोकने में फेल कैसे हुए? किनकी लापरवाही, किनकी अनदेखी थी, जो आतंकी इतना बड़ा हमला कर गया?  किसी ने यदि इसे जान बूझकर होने दिया तो क्यों? तभी पहली प्राथमिकता लापरवाही, खुफिया चूक या जान बूझकर अनदेखी करने वाले देशद्रोहियों को पकड़ने की होनी चाहिए? यदि इस काम में लापरवाही होती है या इस पहलू में दोषी तलाशने का काम कालीन में दबा रहता है, पड़ताल से किसी की कोई जिम्मेवारी, जवाबदेही तय नहीं होती है तो हम सवा सौ करोड़ लोग, भारत के लोग तब क्या समझें?  

सचमुच आंसू के पूरे, पूरे जवाब में पहला सवाल है कि माना पाकिस्तान खलनायक है मगर वहां से इतनी भारी तादाद का, बोरों में भरा आरडीएक्स कैसे भारत में आया या आने दिया?  यहीं दिमाग भन्ना देने वाली बात है कि पांच, दस, बीस किलो नहीं, बल्कि हर रपट बता रही है कि पुलवामा के विस्फोट में एक क्विंटल से ज्यादा आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ!  अलग-अलग रिपोर्टों में किसी जांच सूत्र से सौ तो किसी में डेढ़ सौ से दो सौ किलो आरडीएक्स के इस्तेमाल की बात है। सोचें, सौ किलो याकि एक क्विंटल आरडीएक्स गेंहू के बड़े बोरे से तो लाया नहीं जाएगा। नियंत्रण रेखा पार से छोटे-छोटे पांच-छह बोरों में अलग-अलग वक्त आरडीएक्स भर कर लाया गया होगा। 

और जैसा मैंने कल लिखा कि पांच साल के मोदी-डोवाल के राज में और इजराइल से आई तमाम तकनीक, अत्याधुनिक निगरानी वाले ड्रोन सबसे तो नियंत्रण रेखा पर चौकसी का प्रबंध हुआ पड़ा होगा। मैं ईमानदारी से मानता रहा हूं कि सर्जिकल स्ट्राइक से पहले और बाद में भारत व पाकिस्तान के बीच की जम्मू-कश्मीर वाली नियंत्रण रेखा को मोदी-डोवाल ने अभेदी बना लिया होगा। इजराइल से चुपचाप वह जासूसी तकनीक, ऐसे ड्रोन, ऐसी खुफिया आंखें नियंत्रण रेखा के खुफिया सिस्टम में बनवा ली गई होगीं, जिससे पाकिस्तान से परिंदा भी पार नहीं हो पाए। इजराइलियों के साथ गहरी अंतरंगता में नियंत्रण रेखा पर इधर-उधर के मूवमेंट की जासूसी निगरानी निश्चित ही सौ टका पुख्ता है।

तब भला कैसे बोरों में भर कर आरडीएक्स भारत के डेढ़ सौ किलोमीटर भीतर पुलवामा तक पहुंचा? रविवार को जांच एजेंसियों के हवाले कई नई बातें सामने आई हैं। अंग्रेजी अखबारों में छपी रपटों में बताया गया है कि इतने अधिक आरडीएक्स वाला विस्फोट करवाना 19 साल के लड़के आदिल अहमद के बस में नहीं था। आदिल 11 महीने पहले ही आतंकी बना है। इतने कम समय में इतने आरडीएक्स, उसके विस्फोट के लिए फिर आईईडी बनाने की काबलियत पाना संभव नहीं। सो, वह आरडीएक्स से भरी कार ले जाने वाला महज ड्राईवर रहा होगा। इसी के साथ खबर है कि खुफिया एजेंसियां उस शातिर अफगान आईईडी एक्सपर्ट की तलाश में है, जिसे कामरान के नाम से जाना जाता है। 

तो इसका अर्थ है पुलवामा विस्फोट के तार अफगान आतंकियों तक हैं। पुलवामा हमले की जांच में लगी एजेंसियों के काम को लेकर छपी रपटों के अनुसार बहुकोणीय जांच टीमें बनी हैं। ये टीम चार-पांच लीड पर काम कर रही है। 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फोकस उस बम बनाने वाले अफगान विशेषज्ञ कामरान पर है जो दिसंबर में भारत आया बताते हैं। रिपोर्ट में सुरक्षा सूत्रों के अनुसार खबर है कि इसके दिसंबर में आने व दक्षिणी कश्मीर की पुलवामा, अवंतीपुरा, तराल पट्टी में ऑपरेट करने की खबर सुरक्षा एजेंसियों को रही है। यहीं पुलवामा का मास्टरमाइंड लगता है। 

‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के अनुसार उसने तीन जनवरी को खबर दी थी कि एक आईईडी (improvised explosive devices विस्फोट करने की बटन प्रकिया) एक्सपर्ट और अफगान वार का अनुभवी नौ दिसंबर को भारत में घुसा और वह पुलवामा में कहीं छिपा हुआ है। वह दो अन्य आतंकियों के साथ कश्मीर में घुसा। उस वक्त इंटेलीजेंस इनपुट में उसे अब्दुल रशीद गाजी बताया गया मगर सोर्स अनुसार उसे स्थानीय तौर पर कामरान के नाम से जाना जाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पिछले सप्ताह अन्य एजेंसियों के साथ एक प्राइवेट ट्विटर एकाउंट शेयर किया था। उसमें सुरक्षा बलों पर फिदायीन याकि आत्मघाती हमले की धमकी थी, बतौर मिसाल सोमालिया में सैनिकों के काफिले पर लड़ाकुओं के हमले के वीडिया के साथ।   

इस सबसे इतना तो जाहिर है कि दिसंबर में कोई मास्टरमाइंड और आईईडी का एक्सपर्ट अफगान भारत में आया। तब निश्चित ही खुफिया एजेंसियों ने सोचा ही होगा कि आरडीएक्स भी आया होगा। तभी लाख टके का सवाल है कि राज्यपाल सतपाल मलिक ने जब लापरवाही और इंटेलीजेंस फेल बताया तो उस पर विश्वास करते हुए क्या यह माना जाए कि तब कहीं जान बूझकर तो हमले को रोकने में लापरवाही नहीं थी? तब एप्रोच थी कि आरडीएक्स बोरों में भर कर आ रहा है या उसे कई आंतकी धीरे-धीरे ला रहे हैं या अफगान एक्सपर्ट आया है तो कोई बात नहीं आने दो। आंतकी हमला करते हैं तो करने दो। यदि ऐसा है तब किसके चलते? क्या श्रीनगर में कट्टरपंथी सुन्नी बहुल प्रशासन, खुफिया या पुलिस तंत्र की एप्रोच की बदौलत या केंद्रीय एजेंसियों-सुरक्षा सेटअप के चलते? 

सवाल गंभीर है लेकिन है। कहीं न कहीं, कोई न कोई तो जवाबदेह, जिम्मेदार दोषी है ही, जिसकी लापरवाही, अनदेखी में भारत की जमीन में, पुलवामा में, सुरक्षित काफिले के बीच भारत के जवान शहीद हुए। इस साजिश में पाकिस्तान या आंतकी संगठनों का मकसद समझ आता है लेकिन भारत में जिनकी लापरवाही, अनदेखी, इंटेलीजेंस असफलता से पुलवामा में हमला हुआ उनका मकसद क्या है? (जारी) 

572 Views

बताएं अपनी राय!

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।