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सेकुलर पीटे, मंडल निपटा!

नरेंद्र मोदी, अमित शाह को सलाम! रामचंद्र गुहा सहित उन तमाम सेकुलरवादियों को इन दो ने आज औकात दिखला दी कि तुम जिस नीतिश कुमार पर इतरा रहे थे वह तो सत्ता के लिए कुछ भी करेगा! कोई पांच साल से सेकुलरवादी व ओबीसी राजनीति के मंडलवादी इतराए हुए थे कि उनके पास वह मर्द नेता है जिसने नरेंद्र मोदी को घर बुला कर दुत्कारा। खाना भी नहीं खिलाया। फिर मंडल कार्ड से बिहार में भगवाशाही को पंचर किया। उसे मालूम है गरीब की नब्ज। वह लिए हुए है ईमानदार महानायक की इमेज। भारत के बौद्विक सेकुलवादी इस महानायक को ऐसा तुरूप कार्ड माने हुए थे कि रामचंद्र गुहा ने यह भी कह डाला कि राहुल गांधी से कुछ नहीं बनेगा। कांग्रेस उन्हे हटा कर नीतिश कुमार को कमान दें! 
और आज क्या हुआ? जो हुआ है वह नरेंद्र मोदी- अमित शाह का कई मायनों में यह खुलासा कराना है कि राहुल गांधी यदि बच्चा है तो सेकुलर राजनीति के झंडाबरदार बौद्विक वर्ग तो महामूर्ख! 
इसलिए गुरूवार का दिन भाजपा के लिए, हिंदू राष्ट्रवादियों के लिए यादगार रहेगा। भारत की राजनीति से मंडलवादी कोढ़ को अब खत्म माना जाए। सो हिंदूवादियों को नरेंद्र मोदी, अमित शाह की इस बात के लिए वाह करनी चाहिए जो नीतिश कुमार को अपने खूंटे में बांध कर बिहार से जात, मंडल राजनीति का निपटारा कर दिया। यूपी के बाद बिहार भी आगे भगवा हिंदूवादी राजनीति का गढ़ होगा। 2019 के लोकसभा चुनाव तक  नीतिश कुमार का उपयोग है। उसके बाद अगला विधानसभा चुनाव बिहार में हिंदू, भगवाई आंधी का होगा। लालू यादव से मंडल राजनीति नहीं बचनी है। नीतिश-लालू की जगह बिहार में आगे कांग्रेस का ही बतौर विपक्ष, विकल्प वाला रोल बनेगा। नीतिश कुमार का मतलब अब वैसा ही है जैसा जीतनराम मांझी, रामविलास पासवान, उपेंद्र कुशवाह का है। मंडल या दलित नेता के नाते ये पहले जिस ऐंठ में रहते थे, जैसी राजनीति करते थे वह सब खत्म है और भगवा रामनामी पहन, उसी के सहारे बुढ़ापा काटना है। 
मतलब बिहार का सियासी चरित्र बदला तो मंडलवादी क्षत्रप खलास। इन बातों पर विचार फालतू है कि नीतिश कुमार ने ऐसा क्यों किया? जो हुआ है वह 24 घंटे राजनीति में खोए रहने वाले नरेंद्र मोदी-अमित शाह की उस सियासी शंतरंज का हिस्सा है जिसमें 2019 में किसी भी सूरत में यूपी-बिहार में विपक्षी एकता के महागठबंधन को नहीं होने देना है। इसी मकसद में स्क्रीप्ट लिखी गई। इसे नीतिश कुमार के जार्ज फर्नाडिज से ले कर शरद यादव तक के साथ हुए उनके व्यवहार और लालू की तासीर को समझ कर लिखा गया। प्रारंभ से ले कर आखिर तक स्क्रीप्ट अनुसार काम हुआ और ओबीसी नेता के अपने मिजाज में नीतिश अपना मकड़जाल बुनते-बुनते भगवा मकडजाल बना गए जिसका अंत भी तय है। 
अपने को सहानुभूति है उन तमाम चेहरों, शरद यादव से ले कर रामचंद्र गुहा और किस्म-किस्म के बचे-खुचे समाजवादियों-वामपंथियों- सेकुलरवादियों के प्रति जो अपने का ठगा महसूस कर रहे होंगे और सोच रहे होंगे कि वे इतने मूर्ख थे जो नीतिश कुमार में भविष्य देखा!
 

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