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लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेन्द्र सिंह बने भारतीय सेना के उप सेनाध्यक्ष

New Delhi, Aug 01 (ANI): Lieutenant General Pushpendra Singh assumes the appointment of the Vice Chief of the Army Staff, in New Delhi on Friday. (@PIB_India X/ANI Photo)

लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेन्द्र सिंह ने भारतीय थल सेना के उप सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है। पैरा रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेस) की चौथी बटालियन से संबद्ध इस वरिष्ठ अधिकारी को दिसंबर 1987 में कमीशन प्राप्त हुआ था। 

उन्होंने ला मार्टिनियर कॉलेज, लखनऊ, लखनऊ विश्वविद्यालय और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से शिक्षा प्राप्त की है। एक युवा अधिकारी के रूप में, सेकेंड लेफ्टिनेंट पुष्पेन्द्र सिंह ने भारतीय शांति सेना के तहत श्रीलंका में चलाए जा रहे अभियानों के दौरान अपनी बटालियन को जॉइन किया था। 

4 पैरा अक्टूबर 1987 में श्रीलंका में तैनात की गई थी, जहां उसने जाफना और बाद में किलिनोच्चि में महत्त्वपूर्ण अभियानों में भाग लिया। 22 जुलाई 1989 को सेकेंड लेफ्टिनेंट पुष्पेन्द्र सिंह ईरानामाडु से किलिनोच्चि की ओर जा रही एक 13-सदस्यीय क्विक रिएक्शन टीम का नेतृत्व कर रहे थे, जब उनकी टुकड़ी पर घात लगाकर हमला किया गया। अत्यंत विषम परिस्थितियों में उन्होंने साहसपूर्ण नेतृत्व करते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसमें चार एलटीटीई आतंकवादी मारे गए और कई अन्य घायल हुए।

इस भीषण संघर्ष में उनकी टीम के पांच वीर सैनिकों ने वीरगति प्राप्त की, जबकि सेकेंड लेफ्टिनेंट पुष्पेन्द्र सिंह स्वयं तथा दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। उप सेनाध्यक्ष का कार्यभार संभालने के अवसर पर, लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेन्द्र सिंह ने उन पांच शहीदों के परिजनों और वीर नारियों को इस पावन क्षण का साक्षी बनने हेतु आमंत्रित किया। 

उन्होंने शहीद परिजनों के साथ नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर एटरनल फ्लेम पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और त्याग चक्र पर पुष्पचक्र अर्पित किया, जहां इस अभियान में शहीद हुए पांचों वीरों के नाम अंकित हैं।

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यह पदभार ग्रहण करने से पूर्व वह सेना मुख्यालय में महानिदेशक, परिचालन लॉजिस्टिक्स एवं रणनीतिक आवागमन के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने अपने सैन्य करियर के दौरान ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन ऑर्किड तथा ऑपरेशन रक्षक जैसी महत्त्वपूर्ण सैन्य कार्रवाइयों में भाग लिया है। अपने 38 वर्षों के शानदार सैन्य करियर में उन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण कमान और स्टाफ नियुक्तियां संभाली हैं।

उन्होंने कश्मीर घाटी और नियंत्रण रेखा पर एक स्पेशल फोर्स यूनिट की कमान संभाली। इसके बाद उन्होंने एक इन्फैंट्री ब्रिगेड और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान एक माउंटेन डिवीजन की कमान भी ली। वे हिमाचल प्रदेश में स्थित एक कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग भी रहे, जो जम्मू, सांबा और पठानकोट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी है। उन्हें पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं के संचालनात्मक परिदृश्य की गहन जानकारी और रणनीतिक समझ प्राप्त है।

उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन से स्टाफ कोर्स, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट सिकंदराबाद से हायर डिफेंस मैनेजमेंट कोर्स तथा आईआईपीए से एडवांस प्रोफेशनल प्रोग्राम इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन किया है। उन्होंने ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से प्रबंधन अध्ययन में स्नातकोत्तर और पंजाब विश्वविद्यालय से एम.फिल. की उपाधि प्राप्त की है। राष्ट्र सेवा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल तथा सेना मेडल से सम्मानित किया गया है।

Pic Credit : ANI

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