कांग्रेस ने मंगलवार को महाराष्ट्र की ‘महायुति’ सरकार पर ‘लाडकी बहिन योजना’ के क्रियान्वयन में प्रदेश की महिलाओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाया और दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने के बजाय बड़ी संख्या में पात्र लाभार्थियों के नाम योजना से हटा दिए गए हैं।
पार्टी नेता अतुल लौंढे पाटिल ने मांग की कि सभी पात्र महिलाओं के नाम योजना में शामिल किए जाएं, किसी भी अनियमितता के लिए जवाबदेही तय की जाए तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
पाटिल ने संवाददाताओं से कहा भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं से हर महीने 2,100 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद विभिन्न कारणों का हवाला देकर लाखों महिलाओं को योजना से बाहर किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया का हवाला देकर लगभग 62 लाख महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया है तथा उम्र संबंधी कारणों का हवाला देकर करीब 1.80 लाख महिलाओं के नाम हटाए गए हैं। पाटिल ने आरोप लगाया कि यह महाराष्ट्र की माताओं और बहनों के साथ विश्वासघात है।
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कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं को यह कहकर डराया गया कि उनका डेटा आयकर विभाग को दे दिया गया है।
पाटिल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको भाजपा ने ठगा नहीं। ‘लाडकी बहिन योजना’ के मामले में यह कहावत पूरी तरह लागू होती है।
उधर, महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सोमवार को कहा था कि कई महीनों तक चली ई-केवाईसी सत्यापन प्रक्रिया के बाद राज्य सरकार की ‘लाडकी बहिन योजना’ से करीब 81 लाख पंजीकृत लाभार्थियों के नाम हटा दिए गए हैं।
तटकरे ने मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत में स्पष्ट किया था कि अपात्र लाभार्थियों, आयकरदाताओं और सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को व्यवस्थित तरीके से हटाने के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया जरूरी थी, क्योंकि ये लोग इस योजना के दायरे में नहीं आते हैं।
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