तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने शनिवार को विधानसभा में ‘तेलंगाना प्रजा विश्वासम (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य छोटी-मोटी, तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाना और कारोबार करने में आसानी (ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस) को बढ़ावा देना है।
बिल के बारे में विस्तार से बताते हुए श्री श्रीधर बाबू ने कहा कि यह केंद्र के ‘जन विश्वास’ सुधारों के अनुरूप है जिसके तहत 180 से ज़्यादा छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर जेल की सज़ा की जगह आर्थिक जुर्माना लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि उद्योग आयुक्त के साथ मिलकर राज्य के कानूनों की व्यापक समीक्षा की गई, जिसमें 33 विभागों में 400 से ज़्यादा ऐसे दंडात्मक प्रावधानों की पहचान की गई जिनमें सुधार की ज़रूरत है। प्रस्तावित बिल का उद्देश्य पांच विभागों के 15 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और एक पुराने पड़ चुके कानून को खत्म करना है।
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इन सुधारों में जंगल, आबकारी, वन उत्पादों के व्यापार, कारखानों एवं प्रतिष्ठानों, मज़दूर कल्याण, दुकानों और प्रतिष्ठानों, वैट, नशीली शराब के विज्ञापनों और टीएस-आईपास से जुड़े कानून शामिल हैं।
इस बिल में छोटे अपराधों के लिए जेल की सज़ा की जगह जुर्माना लगाने, एक न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने, उल्लंघन की गंभीरता और अवधि के आधार पर अलग-अलग स्तर की सज़ा तय करने और मुक़दमेबाज़ी कम करने के लिए कुछ अपराधों में आपसी समझौते की अनुमति देने का प्रस्ताव है।
श्री श्रीधर बाबू ने कहा कि इन उपायों से नियामक क्षमता, पारदर्शिता और व्यापार करने में आसानी बेहतर होगी और उन्होंने विधानसभा सदस्यों से बिल को मंज़ूरी देने का आग्रह किया।
तेलंगाना विधानसभा का मॉनसून सत्र शनिवार को छठे दिन में प्रवेश कर गया और सदन की कार्यवाही सुबह 10:00 बजे शुरू हुई।
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