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कृषि विविधीकरण और किसान आय पर फोकस: शिवराज चौहान

New Delhi, Jul 07 (ANI): Union Minister for Agriculture and Farmers Welfare Shivraj Singh Chouhan addresses the gathering during the 11th India Maize Summit organised by the Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry (FICCI), in New Delhi on Monday. (ANI Photo/Ishant Chauhan)

लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि विकास अब क्षेत्रीय जरूरतों और जलवायु के अनुरूप रणनीति पर आधारित होगा, जिसमें किसान आय, खाद्य सुरक्षा और विविधीकरण प्रमुख केंद्र होंगे। 

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए एकरूप नीति के बजाय क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों की जलवायु, जल उपलब्धता और फसल पैटर्न भिन्न होने के कारण कृषि रणनीति भी उसी के अनुरूप तय की जाएगी। 

उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से देश को विभिन्न हिस्सों में विभाजित कर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। चौहान ने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना आवश्यक है। उन्होंने कृषि नीति के तीन प्रमुख लक्ष्य—खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और पोषण—बताते हुए कहा कि इन्हीं के आधार पर आगे की रणनीति तय की जा रही है। 

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना, किसानों को उचित मूल्य दिलाना, नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना और कृषि को बाजार से जोड़ना शामिल है। इसके साथ ही कृषि विविधीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिल सके। छोटे और सीमांत किसानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कम जोत में अधिक आय सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें फसल के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे विकल्प शामिल हैं। 

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किसान क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर उन्होंने कहा कि पात्र किसानों तक सस्ती दर पर ऋण पहुंचाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। वहीं, ‘फार्मर आईडी’ को उन्होंने पारदर्शी और लक्षित कृषि लाभ वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि ‘प्रयोगशाला से खेत तक’ की अवधारणा के तहत वैज्ञानिकों को गांवों में जाकर किसानों से सीधे संवाद करने और नई तकनीकों की जानकारी देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 

उर्वरकों की कीमतों पर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में वृद्धि का बोझ किसानों पर नहीं डाला जाएगा और केंद्र सरकार इसके लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए चौहान ने कहा कि इस संबंध में कड़े कानून लाने की तैयारी की जा रही है, ताकि किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए किसानों को प्रोत्साहन और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे खेती को टिकाऊ बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में कृषि प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी समन्वित रणनीति पर कार्य किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य मिल सके। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन से प्राप्त सुझाव आगामी खरीफ और रबी सत्र की तैयारियों के साथ-साथ दीर्घकालिक कृषि विकास नीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Pic Credit : ANI

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