तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि हथियारों से लैस भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोग बृहस्पतिवार तड़के यहां पार्टी के कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय में जबरन घुस गये और परिसर में तोड़फोड़ की।
बनर्जी ने दावा किया कि इन लोगों ने कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को क्षतिग्रस्त किया तथा वहां मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं के मोबाइल फोन भी ले गए।
भाजपा ने हालांकि इन आरोपों को खारिज कर दिया। बारानगर से भाजपा विधायक सजल घोष ने दावा किया कि इस घटना में पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता शामिल नहीं था।
बनर्जी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में घटना की कथित सीसीटीवी फुटेज साझा की और सवाल किया कि क्या पश्चिम बंगाल के राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय इस मामले में कार्रवाई करेंगे या “आंखें मूंदे रहेंगे”।
डायमंड हार्बर के सांसद ने न्यायपालिका, विशेष रूप से कलकत्ता उच्च न्यायालय से भी इस घटना का “गंभीरता से संज्ञान” लेने और राज्य में कानून का शासन कायम रखने के लिए कार्रवाई करने का आग्रह किया।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने सवाल किया कि वे तृणमूल कांग्रेस और उनसे इतने “डरे हुए” क्यों हैं कि कथित तौर पर इस तरह की धमकी और डराने-धमकाने की जरूरत पड़ रही है।
बनर्जी ने कहा अगर पश्चिम बंगाल में विपक्ष के साथ इसी तरह हिंसा, तोड़फोड़ और डराने-धमकाने का व्यवहार किया जाना है, तो मुख्यमंत्री के पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
इस घटना को ‘‘राजनीतिक ठगी’’ बताते हुए उन्होंने कहा कि हर हमले और डराने-धमकाने की हर कार्रवाई को याद रखा जायेगा और “कुछ भी नहीं भुलाया जायेगा’’।
बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और वकीलों द्वारा बार-बार फोन करने और ईमेल भेजने के बावजूद, कोलकाता पुलिस ने लगभग दो घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और इस बात की जांच की मांग की कि कथित हमले की साजिश किसने रची और किसके निर्देश पर इसे अंजाम दिया गया।
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ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह घटना तड़के लगभग साढ़े चार बजे हुई, जब हथियार लेकर आए लोगों के एक समूह ने कार्यालय में प्रवेश किया और वहां मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट करने के बाद परिसर में तोड़फोड़ की।
उसने दावा किया कि ये लोग एक एयर प्यूरीफायर, प्रिंटर, टेलीविजन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों समेत कई सामान वहां से ले गए।
इस बीच भाजपा विधायक घोष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि इस घटना में भाजपा का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं है।”
उन्होंने सवाल किया कि उस समय तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता कार्यालय में क्यों मौजूद थे और आरोप लगाया कि राजनीतिक सुर्खियों में बने रहने के लिए इस घटना को जानबूझकर अंजाम दिया गया।
तृणमूल कांग्रेस ने सीसीटीवी फुटेज जारी की, जिसमें कथित तौर पर तोड़फोड़ की घटना देखी जा सकती है। तृणमूल कांग्रेस ने मांग की कि फुटेज में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। इस फुटेज की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी।
यह कथित घटना बनर्जी के कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय को लेकर बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच हुई है। हाल के दिनों में यह कार्यालय तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच विवाद का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
पिछले सप्ताह, पुलिस के साथ कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों ने परिसर में लगे तृणमूल कांग्रेस के एक होर्डिंग को हटाने की कोशिश की थी। अधिकारियों का आरोप था कि इसे अवैध रूप से लगाया गया था और इससे सुरक्षा को खतरा था।
तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नगर निगम की टीम की कार्रवाई में कथित तौर पर बाधा डाली थी, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
Pic Credit : ANI
