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कोलकाता में पुलिस और केंद्रीय बलों ने ममता-टीएमसी के विरोध मार्च को रोका

Kolkata, Jun 17 (ANI): TMC chief Mamata Banerjee, with party MLA Kunal Ghosh and other party leaders, joins a protest march by hawkers in Dharmatala, in Kolkata on Wednesday. (ANI Photo)

कोलकाता में मंगलवार को ममता तृणमूल कांग्रेस (ममता टीएमसी) द्वारा आयोजित विरोध मार्च को अनधिकृत करार देते हुए पुलिस और केंद्रीय बलों ने रोक दिया।

प्रदर्शनकारियों ने हालांकि उसी जगह पर एक बैठक कर अपना विरोध जारी रखा। यह मार्च राजाबाजार से पार्क सर्कस तक निकाला जाना था, ताकि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस द्वारा पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जा सके।

प्रदर्शनकारियों ने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चिंताओं के चलते मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। पुलिस की यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की उस चेतावनी के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि दुर्गा पूजा के दौरान राज्य में कोई अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों को तैनात किया जा सकता है।

मंगलवार दोपहर जब मार्च शुरू हुआ, तो पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बलों की एक बड़ी टुकड़ी ने राजाबाजार इलाके में बैरिकेड्स लगा दिए, जिससे प्रदर्शनकारी तय रास्ते पर आगे नहीं बढ़ पाए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे श्री कुणाल घोष, सुश्री डोला सेन और श्री शोवनदेव चट्टोपाध्याय ने मार्च रोके जाने के बाद समर्थकों को संबोधित किया। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रैली में शामिल नहीं हुईं।

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श्री घोष ने राज्य सरकार और केंद्र पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात करके और रैली के खिलाफ चेतावनी जारी करके डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया। श्री घोष ने कहा प्रतिबंधों से प्रदर्शनकारी उकसावे में नहीं आए। हमें एक राजनीतिक संदेश भेजना था और वह अपने लक्षित लोगों तक पहुंच गया।

उन्होंने सीईसी को निशाना बनाने वाले प्रदर्शनकारियों के नारों पर जताई गई आपत्तियों पर भी सवाल उठाए और अधिकारियों पर राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। सुश्री डोला सेन ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी व्यवस्था ने पिछले पांच महीनों में उनकी पार्टी द्वारा आयोजित बैठकों और रैलियों के लिए बार-बार अनुमति देने से इनकार किया है, जिससे उन्हें अदालतों का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने छात्रों और युवाओं से जुड़े विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की आलोचना की। सुश्री सेन ने कहा राज्य सरकार की योजना प्रदर्शनकारियों को उकसाने और फिर उन्हें गिरफ्तार करने या घायल करने की थी। हम उनके जाल में नहीं फंसे।

गौरतलब है कि यह प्रदर्शन एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ जारी विरोध और श्री कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच हो रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में हुए विरोध-प्रदर्शन में सुश्री बनर्जी के शामिल होने और पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। पार्क सर्कस की ओर बढ़ने से रोके जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने राजाबाज़ार में अपना कार्यक्रम जारी रखा और रोके गए मार्च को वहीं एक सभा में बदल दिया।

Pic Credit : UNI

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