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ट्रंप पर महाभियोग की कार्रवाई

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश के इतिहास में तीसरे ऐसे राष्ट्रपति बन गए हैं, जिन पर संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा में महाभियोग की कार्रवाई की गई। ट्रंप के खिलाफ महाभियोग के लिए सदन में दो प्रस्ताव पेश किए गए थे। पहले प्रस्ताव में ट्रंप पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप था। दूसरे प्रस्ताव में उनके खिलाफ महाभियोग सुनवाई के दौरान संसद के काम में बाधा डालने का आरोप लगाया गया। दोनों ही प्रस्तावों पर वोटिंग के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप के खिलाफ और रिपब्लिकन ने उनके पक्ष में वोटिंग की। राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ अब सीनेट में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा।

हालांकि, एक सौ सीटों वाले सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी बहुमत में है। उसके 53 सांसद हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 47 सांसद। उच्च सदन महाभियोग प्रस्ताव को पास कराने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। यानी ट्रंप के खिलाफ करीब 67 सांसदों को वोट करना होगा, जो कि बेहद मुश्किल है। महाभियोग प्रस्ताव पर दोनों पार्टियां साफ तौर पर पक्ष और विपक्ष में खड़ी हैं। रिपब्लिकन पार्टी का पूरा समर्थन ट्रंप को है। इसलिए सीनेट में प्रस्ताव पास नहीं होगा और ट्रंप अपने पद पर बने रहेंगे।

इससे पहले 151 साल के इतिहास में ट्रंप से पहले दो राष्ट्रपतियों- एंड्रयू जॉनसन और बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव सीनेट में पहुंचा था। दोनों ही नेताओं को सीनेट में समर्थन मिला था। 1998 में बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग लाया गया था, जिसे निचले सदन ने पास कर दिया था। लेकिन सीनेट में बहुमत नहीं मिल पाया। वाटरगेट स्कैंडल में तब के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई होने वाली थी, लेकिन उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया।

जब संसद में ट्रंप के महाभियोग पर वोटिंग चल रही थी, तब वे मिशिगन के बैटल क्रीक में सभा को संबोधित कर रहे थे। वहां उन्होंने कहा- हम लोगों के लिए नौकरियां पैदा कर रहे हैं और मिशिगन के लोगों के लिए लड़ रहे हैं। वहीं कट्टरपंथी और वामपंथी कांग्रेस मेरे खिलाफ ईर्ष्या, नफरत और गुस्से से भरी है। आप देख रहे हैं, मेरे साथ क्या हो रहा है।

ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने दो डेमोक्रेट्स और अपने प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए यूक्रेन पर दबाव डाला था। निजी और सियासी फायदे के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए 2020 राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए अपने पक्ष में यूक्रेन से विदेशी मदद मांगी थी। जांच कमेटी के सदस्यों ने कहा था कि ट्रम्प ने राष्ट्रपति चुनाव की अखंडता को कमजोर किया। उन्होंने अपने पद की शपथ का भी उल्लंघन किया।

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