ऐसा क्या हुआ कि उत्तरी कोरिया के लोग कब्र में से मांस निकालकर खाने लगे ..
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ऐसा क्या हुआ कि उत्तरी कोरिया के लोग कब्र में से मांस निकालकर खाने लगे..

kim jong

उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन एक बार फिर चर्चाओं में बने हुए है। कोरोना काल में दुनिया के सभी देशों की इकॉनॉमी प्रभावित हुई है। लेकिन यह कहा जा सकता है कि सबसे ज्यादा उत्तरी कोरिया की हुई है। किम जोंग उन व्यापार के लिए किसी देश पर निर्भर नहीं रहता है। किम जोंग उन का अधिकतर व्यापार चीन से होता है। कोरोना संक्रमण के भय से कोरियाई शासक ने अपनी सीमा को लॉक कर दिया था जिस कारण चीन से भी व्यापार संभव नहीं हो सका। इस कारण उत्तरी कोरिया का बिजनेस पूरी तरह से ठप हो गया। खबर सुनने को मिल रही है कि किम जोंग के देश में खाने-पीने की सामग्री कम हो रही है इस कारण तानाशाह मे अपनी जनता को चेतावनी दी है। खाद्य सामग्री के दाम आसमान छूने की खबर मिल रही है। इससे पहले भी उत्तर कोरिया में भुखमरी ( north corea starvation ) की स्थित आई थी। तब कई जगहों से कोरियाई लोगों के इंसानी मांस खाने की खबरें भी आई थीं।

kim jong un

उत्तर कोरिया के हालात ऐसे है

वहां के शासक किम जोंग उन ने खुद देश में आए खाने के सामान पर संकट की बात की थी।  इस बारे में संयुक्‍त राष्‍ट्र की एजेंसी फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन का भी अनुमान है कि वहां पर लगभग दो महीने तक का ही राशन शेष है।  यही कारण है कि खाने की बहुत समान्य चीजों के दाम भी दसियों गुना तक बढ़ चुके हैं। सरकार ने हालांकि आश्वासन दिया कि वो हर मुमकिन कोशिश कर रही है ताकि लोगों के भूख से मरने की नौबत न आए। विपरीत मौसम ने इसके बाद भी उत्तर कोरिया का पीछा नहीं छोड़ा। लगातार बारिश और तूफानों के कारण फसलों का बर्बाद होना यहां आम है। यही वजह है कि देश की बड़ी आबादी कुपोषण का शिकार हो चुकी है। यूनाइटेड नेशन्स का मानना है कि 5 में से 2 उत्तर कोरियाई युवा कुपोषण के कारण कई बीमारियां झेल रहा है।

अस्सी के बाद सबसे भयंकर बारिश

इसके अलावा किम जोंग ने संकट की बात करते हुए कोरोना के अलाव खराब मौसम की भी बात कही। यहां लगातार आए तूफान ने फसलों को खराब कर दिया है। इस बात की जानकारी खेती-किसानी की जानकारी देने वाली पेरिस स्थित संस्था जियोग्लैम ने दिया। संस्था के मुताबिक इस देश में साल 1981 के बाद से साल 2020 में सबसे ज्यादा बारिश हुई और तूफान आए। ये आपदाएं अगस्त से सितंबर के बीच आईं, जब उत्तर कोरिया में फसलें तैयार हो चुकी होती हैं। इससे फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं।

north corea

हागूपिट ने बर्बाद की फसलें

जियोग्लैम की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में उत्तरी कोरिया में एक चक्रवाती तूफान आया था हागूपिट। जिसने भंयकर तबाही मचाई थी। इसमें लगभग 40 हजार हेक्टेयर खेती बर्बाद हो गई। और इसके बाद कोरोना ने कमी पूरी कर दी। व्यापार बंद होने के कारण उत्तर कोरिया में खाद्यान्न संकट गहरा चुका है। कुछ समय पहले यह खबर मिली थी कि उत्तरी कोरिया में केले का भाव 3000 रूपये प्रति किलो हो रहा है। इस बात सो अंदाजा लगा सकते है कि वहां के हालात क्या होंगे। सामान्य वस्तुओं के दाम भी आसमान छू रहे है और को तो कहना ही क्या।

north corea Dictator

जंगली फल-फूल खाने लगे

भुखमरी के इतिहास में अहर किसी देश का नाम आता है तो वह है उत्तरी कोरिया। इतिहास भी इस बात की गवाही देता है। साल 1948 में नॉर्थ कोरिया अलग देश का दर्जा दिया गया। वहां का मौसम तब भी खाद्यान्न उपजाने के अनुकूल नहीं था लेकिन तब रूस ने इस कोरियाई देश की मदद की और मुश्किल का एकदम ठीक-ठीक अंदाजा नहीं हो सका। हालांकि अकाल से इस आत्मनिर्भरता का सच सामने आ गया। तब अन निनो मौसम चक्र के कारण उत्तर कोरिया में भयंकर बाढ़ आई। इससे सारी फसलें तबाह हो गईं। खाद्यान्न खत्म हो गया। पहले सरकार दो समय खाने की अपील करती थी, फिर सरकारी टेलीविजन पर एक समय खाने की अपील होने लगी।हिस्ट्री.कॉम में इसका जिक्र मिलता है। लोग जंगली फल-फूल खाने लगे। जहरीली चीजों के खाने से मौतें होने लगीं।

दिया आत्मनिर्भरता का मंत्र

अस्सी के दशक से सोवियत संघ कमजोर होने लगा और फिर पूरी तरह से खत्म हो गया। इसके साथ ही उत्तर कोरिया को मिलने वाला अनाज और तेल एकदम से बंद हो गया। तब देश के तत्कालीन नेता किम Il संग ने एक नया टर्म दिया।Juche यानी आत्मनिर्भरता। इसका मतलब है देश हर मायने में आत्मनिर्भर हो, चाहे वो राजनीति हो, कृषि, उद्योग या मेडिसिन। तबसे लेकर आज तक देश का दावा है कि वो सारे काम खुद करता है। मजाक में यहां तक कहा जाता है कि हैमबर्गर खाने के शौकीनों ने अपने लिए स्थानीय हैमबर्गर बना लिया, जिसे वहां डबल ब्रेड विद मीट कहते हैं।

north corea

भुखमरी के मारे लाश खा रहे लोग

द संडे टाइम्स ने एक रिपोर्ट में बताया कि उत्तर कोरियाई लोग भूख के मारे इंसानी मांस खाने लगे हैं। लाइव साइंस वेबसाइट में भी इसका जिक्र है। भूख से अपने दिमाग पर काबू खो चुके लोग अपने ही परिवार के लोगों को मारकर और पकाकर खाने लगे। कई जगहों पर ताजी कब्रें खोदकर उनसे लाशें निकालकर खाने की रिपोर्ट्स आईं। ऐसी खबरें सुनकर रोंगटें खड़े हो जाते है। और उत्तरी कोरिया में लोग लाश निकालकर उसका मांस खा रहे है। वहां के लोगं से अब भूख सहन नहीं हो रही है। जापानी की न्यूज साइट एशिया प्रेस ने सबसे पहले ये खबर की थी। इसके बाद तो पूरी दुनिया में तहलका मच गया था। तब बहुत से देशों ने आगे आकर उत्तर कोरिया की तत्कालीन सरकार से मदद की पेशकश की थी, जिसे उसने स्वीकारा भी था।

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