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भारत को आंकड़ों की धोखाधड़ी रोकने के उपाय करने होंगे: सं.रा.

नई दिल्ली। भारत को अपने लोगों को अनैतिक तत्वों द्वारा धोखाधड़ी और आंकड़ों के दुरुपयोग से बचाने के लिए नियामकीय सुधारों की जरूरत है। यह बात भारत में संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय संयोजक यूरी एफानसीव ने कही है।

उन्होंने यहां संयुक्त राष्ट्र द्वारा वित्तीय समावेशन पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कई कंपनियों, लोगों तथा संस्थानों के बीच धन से लेकर चिकित्सा रिकार्ड तक को साझा करने के मौजूदा कूट आंकड़ा स्थानांतरण प्रोटोकॉल से यह सवाल खड़ा होता है कि इन आंकड़ों को कैसे रखा जाता है। कैसे ये सरकार और निजी इकाइयों तक पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के समय में इन चीजों को लेकर उल्लंघन हुए हैं। इससे ऐसे नियामकीय सुधारों की जरूरत महसूस हुई है जिससे इस तरह की धोखाधड़ी और दुरुपयोग को रोका जाना चाहिए। प्रधानमंत्री जनधन योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अभी इसको लेकर विभिन्न चुनौतियां हैं जिनको हल किया जाना है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार की पहल के बावजूद अभी भी छह करोड़ लोगों का बैंक खाता नहीं है। दूरदराज के क्षेत्रों में अभी तक मोबाइल फोन सेवा या 3जी-4जी नेटवर्क नहीं पहुंचा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मोबाइल टेलीफोनी से बैंक शाखा स्थापित करने की जरूरत कम हुई है, लेकिन अंतिम छोर तक कनेक्टिवटी पहुंचाना चुनौती है।

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