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कुल्लू मनाली में 1700 से अधिक होटलों की जांच के लिए पैनल गठित किया

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू एवं मनाली शहरों में 1700 से अधिक होटलों, लॉज और ठहरने के स्थानों की जांच के लिए आज एक समिति का गठन किया। ये शहर अपनी मनोहर प्राकृतिक छटा के लिए मशहूर है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अगुवाई वाली पीठ ने राज्य पर्यटन विभाग एवं हिमाचल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वरिष्ठ अधिकारियों, शिमला स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन स्टडीज से वैज्ञानिकों, कुल्लू एवं मनाली के एसडीएम तथा आबकारी विभाग से एक प्रतिनिधि को शामिल करते हुए एक समिति का गठन किया। पीठ ने कहा, उक्त समिति अगले सप्ताह सोमवार से जांच शुरू करेगी और सभी होटलों, लॉजों एवं ठहरने की जगहों की जांच करेगी। पीठ ने कहा, हालांकि वे ऐसे होटलों के खिलाफ पहले कार्वाई करेंगे जिनके पास किसी भी श्रेणी में 25 से अधिक कमरे मौजूद हैं।

हरित अधिकरण ने पैनल को संयुक्त जांच शुरू करने का निर्देश देते हुए जल स्रोत, ठोस अपशिष्ट पदाथरें के प्रबंधन, मल-जल शोधन संयंत्र, बिजली के स्रोत आदि के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा है। पीठ ने कहा, अगर कोई भी प्रथम श्रेणी होटल, लॉज, ठहरने का स्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति के बिना संचालन करता या वन क्षेत्र में स्थित पाया जाता है तो उसे तुरंत बंद करने और सभी अधिकारियों द्वारा विपंजीकृत करने का आदेश दिया जाएगा।

इसने कहा कि समिति पर्यावरण संरक्षण की सिफारिशों के साथ हिमाचल प्रदेश सरकार को रिपोर्ट जमा करेगी, साथ ही यह सुनिश्‍चित करेगी कि ये भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा संभावित क्षेत्र में नहीं हैं। यह आदेश मनाली के रहने वाले रमेश चंद की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया है। रमेश ने इन्हें बंद करने की मांग करते हुए याचिका में आरोप लगाया कि कई होटलों का अवैध निर्माण हुआ और वे अधिकारियों से मंजूरी के बगैर संचालित हो रहे हैं।

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