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सीएए का प्रभाव : असम में फीका दिख रहा क्रिसमस का उत्सव

गुवाहाटी। विवादास्पद संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में असम में प्रदर्शन को देखते हुए क्रिसमस पर रौनक नहीं है। निराशाजनक माहौल के बीच शांति और खुशी के लिए मंगलवार की रात राज्य भर में प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं।

विभिन्न गिरजाघरों के पादरियों ने कहा कि राज्य की स्थिति और माहौल के कारण पर्व मनाने का उत्साह नहीं दिख रहा। स्थानीय गिरजाघर के फादर थॉमस ने बताया, ‘‘प्रभु यीशु के पवित्र जन्म उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस बार हम महज क्रिसमस ट्री की सजावट के साथ पर्व मना रहे हैं।’’

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उन्होंने कहा कि गिरजाघर की सजावट के लिए रंग-बिरंगे प्रकाश की व्यवस्था नहीं की गई है। डिब्रूगढ़ में एक पादरी ने बताया कि राज्य के विभिन्न स्थानों के निवासियों ने मंगलवार को मध्य रात्रि में प्रार्थना के दौरान शांति की कामना की। क्रिसमस से जुड़े सामानों की बिक्री करने वाले एक दुकानदार मनोहर लाल ने कहा, ‘‘इस बार ग्राहकों की संख्या बहुत कम है। सीएए प्रदर्शनों से पहले मैंने जो सामान मंगवाए थे वे वैसे ही पड़े हुए हैं और उनके खरीदार बहुत कम हैं।’’

जोरहाट में इस तरह के सजावट का सामान बेचने वाले हेमंत गोगोई ने कहा, ‘‘मुझे बुरा नहीं लग रहा कि मेरे सामान नहीं बिक रहे हैं क्योंकि सीएए के कारण राज्य में माहौल सही नहीं है और गुवाहाटी में सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान पांच लोग मारे गए।’’ हर वर्ष विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने वाले राज्य के होटल इस बार कार्यक्रमों से दूर हैं। गुवाहाटी में एक बड़े होटल के प्रबंधक ने बताया कि राज्य की वर्तमान स्थिति होटलों में कार्यक्रम आयोजित करने की इजाजत नहीं देती।

बारपेटा में क्रिसमस के लिए सजावट के सामान बेचने वाले इनामुल अली ने कहा, ‘‘हम सीएए का विरोध करते हैं और अपने असमिया समुदाय, भाषा और संस्कृति के लिए अपनी आमदनी भी छोड़ने के लिए तैयार हैं। हम कानून का विरोध करते हैं क्योंकि इससे हम बर्बाद हो जाएंगे।’’ असम में हुए सबसे भीषण प्रदर्शनों के दौरान पांच लोगों की मौत हो गई।

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