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कर्नाटक में कोरोना के 97 नए मामले, कुल संख्या 2056

बेंगलुरु। कर्नाटक में कोरोना वायरस के 97 नए मामले सामने आने के साथ राज्य में कुल मामलों की संख्या 2,000 के पार पहुंच गई है, जबकि अस्पतालों से 26 मरीजों को छुट्टी मिलने के बाद ठीक होने वालों की कुल संख्या 634 हो गई है। आज यहां एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

राज्य के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, पिछले 18 घंटों के दौरान 97 और मामले सामने आने के साथ राज्य भर में कोविड-19 मामलों की कुल संख्या 2,056 है। राज्य में सक्रिय मामलों की संख्या 1,378 है और कोविड -19 से 42 मौतें हुई है जिनमें नॉन-कोविड कारणों से 2 मौतें शामिल हैं।

डिस्चार्ज हुए 26 लोगों में से दावणगेरे के 18, चित्रदुर्ग के 4, बागलकोट के 3 और हावेरी के एक हैं। नए मामलों में, 41 महिलाएं हैं और 19 बच्चे हैं। अधिकारी ने कहा कि 97 नए मामलों में से 68 मामले महाराष्ट्र से लौटने वालों के हैं। कर्नाटक के 30 जिलों में से, चिक्कबल्लापुर में सबसे अधिक 24 मामले दर्ज किए गए, इसके बाद उडुपी (18), हासन (15) और कलबुरागी, यादिगिरी और मांड्या (तीनों में 6-6) शामिल हैं।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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