अधिवक्ता कल्याण योजना के खिलाफ वकील पंहुचे उच्च न्यायालय

नई दिल्ली। दिल्ली की आप सरकार की मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना का लाभ दिल्ली बार काउन्सिल में पंजीकृत सभी वकीलों को दिलाने के लिये उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी है ,भले ही दिल्ली की मतदाता सूची में उनका नाम हो या नहीं।

इस याचिका पर कोरोना वायरस का खतरा खत्म होने के बाद सुनवाई की उम्मीद है। पांच अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता नगिन्दर बेनीपाल ने बताया कि उन्होंने उच्च न्यायालय रजिस्ट्रार (लिस्टिंग और फाइलिंग) के समक्ष इस याचिका का फोन पर उल्लेख किया

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और उनहें अदालत के अधिकारी ने सूचित किया है कि कोरोना वायरस का खतरा समाप्त होने के बाद से सूचीबद्ध किया जायेगा। कोरोना वायरस महामारी के खतरे को देखते हुये इस समय उच्च न्यायालय का कामकाज चार अप्रैल तक के लिये निलंबित है और अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई के लिये रजिस्ट्रार के यहां फोन पर ही इसका उल्लेख किया जा सकता है

और आवश्यक होने पर वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से याचिका की सुनवाई की जायेगी। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली बार काउन्सिल में पंजीकृत और राष्ट्रीय राजधानी में वकालत कर रहे सभी वकीलों के लिये नवंबर 2019 में एक कल्याण योजना की घोषणा की थी। सरकार ने इस योजना के लिये निधारित 50 करोड़ रूपए की धनराशि के उपयोग के बारे में सिफारिशें करने के लिये वकीलों की 13 सदस्यीय समिति गठित की थी। सरकार ने पिछले साल 18 दिसंबर को समिति की सारी सिफारिशें स्वीकार कर ली थीं।

याचिका के अनुसार यह योजना दिल्ली बार काउन्सिल के पंजीकृत सभी वकीलों पर लागू होने की समिति की सिफारिश के बावजूद मंत्रिपरिषद ने इसे सिर्फ दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल वकीलों तक सीमित कर दिया है जो मनमाना है। याचिका दायर करने वाले वकीलों में बलविन्दर सिंह बग्गा, मनीषा सरोहा, विवेक जैन, शिवम चानना और वैभव कालरा शामिल हैं। इन सभी से वकीलों की कल्याण योजना दिल्ली बार काउन्सिल के उन वकीलो तक सीमित करने के सरकार के निर्णय को चुनौती दी है जिनके नाम दिल्ली की मतदाता सूची में हैं।

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