जयंत, प्रियंका के बाद अखिलेश किसान पंचायत से बनाएंगे भाजपा के खिलाफ माहौल -
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जयंत, प्रियंका के बाद अखिलेश किसान पंचायत से बनाएंगे भाजपा के खिलाफ माहौल

लखनऊ। तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों ने महापंचायतें शुरू की है। राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, केजरीवाल के बाद अब सपा मुखिया अखिलेश यादव किसान पंचायत के जरिए पश्चिमी यूपी की सियासत को परखने और भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने मैदान में उतरने जा रहे हैं।

इसकी शुरूआत आज से अलीगढ़ के टप्पल से होने जा रही है। यहां पर किसान महापंचायत हो रही है। किसी समय किसान आंदोलन के लिए चर्चित रहे टप्पल में आज पंचायत करेंगे। इसके बाद किसान आंदोलन का केंद्र ंरहे बाजना मथुरा में वह 19 मार्च को पंचायत करेंगे। इससे पहले वह 17-18 मार्च को मथुरा के पार्टी शिविर में भाग लेंगे। इसके अलावा वह मेरठ के मवाना और कासगंज में जल्द किसानों की पंचायत करेंगे। किसानों के पक्ष में टप्पल में हो रही पहली रैली के माध्यम से वह किसानों को साधने का प्रयास करेंगे।

ज्ञात हो कि पश्चिमी यूपी में राजनीति की दशा और दिशा जाट और मुस्लिम तय करते हैं। किसान आंदोलन के माध्यम से शून्य पड़ी रालोद में फिर से जान आयी है। चौधरी अजीत और उनके बेटे जयंत मिलकर खोया जनाधार वापस लाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं। वह पश्चिमी यूपी में तमाम जिले में पंचायत कर जाटों को अपने पाले में लाने का प्रयास कर रहे हैं।

वहीं प्रियंका गांधी भी सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर के बाद मेरठ में भी पंचायत करने जा रही है। पंचायत में आ रही भीड़ से वह काफी गदगद हैं और उनके हौसले बुलंद हैं। उत्तर प्रदेश में जमीन तलाश रही आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल मेरठ में पंचायत कर अपने समीकरण साधते नजर आए हैं। शायद इसी कारण पश्चिमी यूपी में राजनीतिक दलों की सक्रियता को देखते हुए अखिलेश ने भी किसानों के पक्ष में पंचायत करने की रणनीति तैयार की है। वह इसके माध्यम से 2022 का रास्ता तैयार करने के फिराक में लगे हैं।

सपा के एमएलसी सुनील साजन का कहना है कि समाजवादी पहले ही दिन से तीन नए काले कानूनों के खिलाफ है। वह किसानों के साथ खड़ी नजर आ रही है। पंचायत में श्रेय लेने जैसी कोई बात नहीं है। सपा का अब कार्यक्रम लगातार चलेगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष रैली और पंचायत के माध्यम से कानूनों का विरोध करेंगे। पार्टी के सभी कार्यकर्ता और नेता गांव-गांव जाकर इन कानूनों के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को जागृत करेंगे। तमाम उपक्रम के साथ सरकार खेती भी चुनिंदा उद्योगपतियों को देना चाहती है। जिसका सपा विरोध कर रही है।

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