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शारीरिक शिक्षकों की भर्ती उम्र भी दूसरे विषय जितनी हो : पियूष

नई दिल्ली। फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया (पेफी) के सचिव डॉ पियूष जैन ने कहा है कि हाल ही में दिल्ली सरकार के तहत दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा निकाली गयी नौकरियों में शारीरिक शिक्षकों के साथ किये गए भेदभाव से पूरी दिल्ली ही नहीं देश भर के शारीरिक शिक्षकों में रोष है।

पियूष जैन ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि पिछली बार की तरह इस बार फिर से दिल्ली में शारीरिक शिक्षा के साथ भेदभाव किया जा रहा है। एक तरफ जहां दूसरे विषयों के शिक्षकों के लिए पीजीटी और टीजीटी की आयु सीमा 36 और 32 साल रखी गयी है वहीं शारीरिक शिक्षा विषय के लिए यह आयु 30 वर्ष रख कर हजारों बेरोजगार युवाओं से छल किया गया है।

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डॉ जैन ने बताया कि जहां दूसरे विषय के शिक्षक दो साल बीएड की पढ़ाई करते हैं वहीं शारीरिक शिक्षा के शिक्षक भी बीपीएड की दो साल की पढ़ाई करके ही शिक्षक बनते है और दोनों ही कोर्स भारत सरकार के राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित है। उन्होंने कहा कि जब दोनों ही कोर्स समान है फिर यह भेदभाव कैसा है।  उन्होंने कहा कि पेफी दिल्ली सरकार से मांग कराती है कि वह शारीरिक शिक्षकों के साथ अन्याय ना करते हुए इस विषय के पीजीटी और टीजीटी की आयु सीमा क्रमश: 36 और 32 साल करे जिससे अधिक से अधिक शारीरिक शिक्षक इस भर्ती में हिस्सा ले सकें।

फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया ने इस विषय की गंभीरता से लेते हुए पूरी दिल्ली के शारीरिक शिक्षकों की एक बैठक 21 जनवरी को आईटीओ दिल्ली स्थित मालवीय स्मृति भवन में बुलाई है जिसमे शारीरिक शिक्षा के साथ हो रहे अन्याय पर शारीरिक शिक्षकों के साथ चर्चा की जायेगी और आगे की रणनीति बनायी जायेगी। पेफी ने देश भर के शारीरिक शिक्षकों से अपील की है कि इस बैठक में अधिक से अधिक संख्या में आयें और अपने हक़ के लिए आवाज उठाएं।

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