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पराली न जलाकर अजनाला ने पेश की मिसाल

अमृतसर। पंजाब और हरियाणा के किसान जहां पराली को जलाकर प्रदूषण का कारण बने हुए हैं, वहीं पंजाब के अजनाला के किसानों ने पराली नहीं जलाकर अन्य किसानों के लिए एक मिसाल पेश की है।  मुख्य कृषि अधिकारी दलबीर सिंह छीना ने आज गाँव माकोवाल (अजनाला) के किसान शिवदेव सिंह, गाँव अवाण (अजनाला) के किसान अमरीक सिंह, गाँव वल्ला के किसान रणजीत सिंह, दूसरे किसानों के लिए मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि इन किसानों ने हैपीसीडर की सहायता से गेंहू की बिजाई की तथा पराली को खेतों में ही मिला दिया।

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उन्होंने बताया कि झौजोटी गांव के जगदेव कल, छीना कर्म सिंह, राजे, ढेर और दूसरे कई गाँवों के किसानों ने पराली को आग न लगा कर वातावरण की संभाल में विशेष योगदान डाल है। डॉ छीना ने कहा कि गेहूँ का बीज केवल पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी द्वारा प्रमाणित किस्मों जैसे कि एच.डी. -2967, एच.डी. -3086, उन्नत पी.बी.डबल्यू -343, उन्नत पी.बी.डबल्यू -550, पी.बी.डबल्यू जिंक, पी.बी.डबल्यू -725, पी.बी.डबल्यू -677, डब्ल्यू एच 1105, पी.बी.डबल्यू 621, डब्ल्यू एच डी 943 और देरी से बिजवाई के लिए पी.बी.डबल्यू 658, पी.बी.डबल्यू 590 ही रजिस्टर्ड डीलरों से ही खरीदा जाये। उन्होंने बीज विक्रेताओं को सख़्त हिदायत दी कि गेहूँ का केवल प्रमाणित किस्मों का बीज ही बेेंचे जाएं। यदि कोई डीलर ग़ैर प्रमाणित किस्मों का बीज बेचता पकड़ा गया तो उसके विरुद्ध बीज एक्ट अनुसार सख़्त कानूनी कार्यवाही की जायेगी।

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