अक्षय तृतीया2021: बीका तेरो बीकाणो जोधाण स सवायो बाजसी..करणी माता के आशीर्वाद से बना बीकानेर, आइये जानते है बीकानेर के इतिहास के बारे में ..

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राजस्थान के पश्चिमी सीमा पर स्थित बीकानेर के शोर्य से शायद ही कोई अपरिचित है। बीकानेर धार्मिक दृष्टि से जितना महत्व रखता है तो सांस्कृतिक दृष्टि से भी उतना ही महत्वपुर्ण है । जमीन का जेवर कहलाने वाला जुनागढ़ इस बीकानेर में है तो करणी माता का विश्व प्रसिद्ध देशनोक मंदिर भी बीकानेर की ही धरती पर स्थित है। वहीं देशनोक जो जिसमें 20,000 चुहे रहते है। बीकानेर जो अपने ऊंटो के लिए जितना प्रसिद्द है तो एशिया की सबसे बड़ी ऊन की मंडी भी यही स्थित है। बीकानेर जो अपने रसगुल्लों के लिए एक विषिष्ठ पहचान रखता है। और बीकानेरी भुजिया की विशेषता तो कुछ ऐसी है कि लाख कोशिशों का बाद भी ऐसा स्वाद वाली भुजिया बनाने में दुनिया का हर व्यक्ति नाकाम रहा है। हजार हवेलियों वाला शहर कहलाने वाले बीकानेर की स्थापना अक्षय तृतीया के दिन हुई  थी।

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बीकानेर की स्थापना से जुड़ी कुछ कहानियां

बीकानेर के संस्थापक जोधपुर के राजा राव जोधा के पुत्र राव बीका है। एक मान्यता के अनुसार, एक बार जोधपुर के राजा राव दोधा अपने दरबार में बैठे थे तब राव बीका और उनके काका कांधल आपसे में कुछ बातें कर रहे थे तब राव जोधा ने उन पर चुटकी लेते हुए कहा कि आपस में बात तो ऐसे कर रहे जैसे नए राज्य की स्थापना करेंगे। यह बात बीका को चुभ गई और उसी समय वह अपने काका कांधल के साथ नए राज्य की स्थापना करने निकल पड़े। नए राज्य की खोज के दौरान पश्चिमी भाग में उनकी मुलाकात करणी माता से हुई और राव बीका ने करणी माता से नए राज्य बसाने के संबंध में सुझाव मांगा। करणी माता ने उनको वहीं पर राज्य बसाने का सुझाव दिया और साथ ही यह आशीर्वाद दिया कि बीका तेरो बीकाणो जोधाण स सवायो बाजसी….और यहीं पर राव बीका ने बीकानेर राज्य की स्थापना की। और इसी बीकानेर की स्थापना अक्षय तृतीया के दिन हुई थी। जिसे मारवाड़ी में आखातीज बोलते है।

वहीं दूसरी मानयता के अनुसार एक बार राव जोधा किसी युद्ध को जीत कर वापस आ रहे थे और बीका भी उनके साथ थे तब उन्होनें बीका से जोधपुर का उतराधिकारी नहीं बनने का निवेदन किया। बीका इसके लिए खुशी-खुशी तैयार हो गए और कहा कि वह एक नए राज्य की स्थापना करेंगे लेकिन जोधपुर राज्य से कुछ वस्तुएं उनको चाहिए और वो वस्तुएं थी-राव जोधा का सिंहासन और उनसे जुड़ी कुछ वस्तुएं। इसके बाद राव बीका नए राज्य बसाने निकल पड़े और उनकी मुलाकात करणी माता से हुई।

जाट जाति द्वारा किया जाता है राज तिलक

राव बीका जब बीकानेर राज्य की स्थापना के लिए पश्चिमी क्षेत्र में पहुंचे तब वहीं जाटो की छः जातिया राज करती थी। जिनमें से गोदारा जाति के जाटों ने सबसे पहसे बीका नए राज्य में सहायता करने की बात कही। तभी से बीकानेर राज्य के राजाओं का राजतिलक गोदारा जाति के जाटों द्वारा ही किया जाता है।

बीकानेर में अक्षय तृतीया पर है पतंग उड़ाने की परंपरा

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग मौकों पर पतंगबाजी करने की परंपरा है। वहीं बीकानेर के लोग अक्षय तृतीया के दिन बीकोनेर की स्थापना दिवस के रूप में पतंगबाजी करते है साथ ही इस दिन सात अनाजों से मिला खिचड़ा बनाया जाता है उसके सात ही इमली से बना पेय भी इसी के सीथ परोसा जाता है।

  1. जूनागढ का किला

जुनागढ़ का किला जो एक ऐतिहासिक किला है जो राजस्थान के बीकानेर शहर में स्थित है। यह राजस्थान के कुछ प्रमुख किलों में से एक है जो एक पहाड़ी की चोटी पर नहीं बनाया गया है और बीकानेर में देखने के लिए प्रमुख स्थानों में से एक है। मूल रूप से यह चिंतमनी के रूप में जाना जाता है, किले का नाम बदलकर 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में जुनागढ़ या ‘पुराना किला’ रखा गया था जब सत्तारूढ़ परिवार किले की सीमा के बाहर लालगढ़ महल में चले गए थे। बीकानेर का आधुनिक शहर किले के आसपास विकसित हुआ है। जुनागढ़ किला मूल रूप से 1589 और 1593 ईस्वी के बीच बीकानेर के 6 वें शासक राजा राय सिंह द्वारा बनाया गया था। बाद मे कई राजाओं ने इसमे अनेक निर्माण कराए, जिसके परिणामस्वरूप कई महलों, संग्रहालयों, मंदिरों और बागानों इस महल परिसर मे है। इस किले पर कई बार हमला किया गया है लेकिन कभी जीता नहीं गया। केवल कमर मिर्जा, जो बाबर के पुत्र थे, किले को पकड़ने में सक्षम थे लेकिन एक दिन से भी ज्यादा समय तक अपने पकड़ को बरकरार नहीं रख पाए। जुनागढ़ किला बीकानेर के प्रसिद्ध स्मारकों में से एक है जो पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है। इसकी विशाल संरचना और स्थापत्य डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध, किला एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है जो 986 मीटर लंबी दीवार से घिरा हुआ है। किले में 37 बुर्ज, एक घास मैदान और दो प्रवेश द्वार, सूरज पोल या सन गेट और करण पोल शामिल हैं। जुनागढ़ किले के भीतर उल्लेखनीय आकर्षण में, अनुप महल, हवा महल, चंद्र महल, फूल महल, बादल महल, दीवान-ए-खास, डुंगर महल, गंगा महल और रंग महल शामिल हैं। लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बने महल किले की मुख्य आकर्षण हैं।

किले परिसर में सबसे प्रमुख महलों में से एक चंद्र महल या चंद्रमा पैलेस है। यह अपने नक्काशीदार संगमरमर पैनल, दर्पण और चित्रों के साथ शानदार है। फूल महल या फूल पैलेस भी चश्मा और दर्पण से सजा है। जुनागढ़ किले में अनुप महल एक और सार्थक आकर्षण है। यह एक बहु मंजिला इमारत है जो शासकों के लिए एक बार शासन कक्ष के रूप में कार्य करती है। आज, महल शाही परिवार के खजाने को प्रदर्शित करता है। कमरों की दीवारों को लाल और सोने के लाह काम के साथ-साथ ग्लास में जड़ी के काम से खूबसूरती से सजाया गया है। बादल महल या बादलों का महल दीवारों के लिए जाना जाता है, जो सुंदर फ्रेशको चित्रों से सजाए जाते हैं, जो भगवान बारिश बादलों के बीच कृष्ण और देवी राधा को दिखाते हैं।

  1. लालगढ़ पैलेस

लालगढ़ पैलेस बीकानेर में स्थित एक शाही महल है। यह ब्रिटिश राजाओं द्वारा भारतीय राजाओं के लिए शुरू किए गए कुछ महलों में से एक है और राजस्थान पर्यटन का अनुभव करने के लिए शीर्ष स्थानों में से एक है।राजसी भव्यता के बीच खड़े होकर और रॉयल्टी की गौरवशाली कहानियों को व्यक्त करते हुए, बीकानेर में लालगढ़ पैलेस राजस्थान के इतिहास में सबसे आकर्षक महलों में से एक है। महल 1902 और 1926 ईस्वी के बीच ब्रिटिश वास्तुकार सर सैमुअल स्विंटन जैकब द्वारा महाराजा गंगा सिंह के लिए बनाया गया था।

लालगढ़ पैलेस भारतीय, यूरोपीय और मुगल वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। तीन मंजिला परिसर थार रेगिस्तान से निकाले गए लाल बलुआ पत्थर के साथ बनाया गया है। बीकानेर का शाही परिवार अभी भी महल में रहता है और जिनके लिए एक हिस्सा रिजर्व है। महल में एक सुंदर पोर्टिको है और इसमें कई अतिसंवेदनशील बालकनी और जाली का काम है। जटिल ढांचे और नेटवर्क संरचना के मुख्य आकर्षण हैं। इसके अलावा, मोर नृत्य के साथ बगीचे महल परिसर में अन्य आकर्षण हैं। इस महल को महाराजा गंगासिंह द्वारा अपने पिता की याद में बनवाया गया था। जिसमें सोने-चांदी के बिस्तर लगे हुए है।

  1. करणी माता मंदिर

करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक शहर में स्थित एक हिंदू मंदिर है। यह राजस्थान में तीर्थयात्रा के शीर्ष स्थानों में से एक है और शीर्ष बीकानेर आकर्षण में से एक है।देशनोक में करणी माता मंदिर देवी दुर्गा के अवतार कर्ण माता को समर्पित है। चूहे मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, मंदिर चूहे की पूजा के लिए एक प्रसिद्ध केंद्र है और हर दिन कई आगंतुकों को आकर्षित करता है। यह 600 साल का मंदिर हजारों काले, भूरे और सफेद चूहों या काबा का घर है। लोकगीत के अनुसार, इस मंदिर में चूहों को खिलाने से अच्छा भाग्य आता है। स्थानीय विश्वास के अनुसार, चूहों पवित्र पुरुषों के रूप में पुनर्जन्म लेंगे। नवरात्रों में करणी माता मंदिर देशनोक में मेला भरता है। बड़ी संख्या में भीड़ इक्कठी होती है। लोग अपनी श्रद्धानुसार पैदल भी जाते है।

  1. गजनेर वन्यजीव अभ्यारण्य

बीकानेर से 37 किमी की दूरी पर, बीकानेर में गजनेर वन्यजीव अभयारण्य गजनेर पैलेस के पास गजनेर झील के किनारे पर एक प्राकृतिक हेवन है। यह राजस्थान में प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है और बीकानेर में जाने के लिए प्रमुख स्थानों में से एक है। एक छोटी पहाड़ी के ऊपर स्थित, गजनेर वन्यजीव अभयारण्य है। घने हरे जंगल के कवर के साथ वनस्पतियों और जीवों में समृद्ध रिजर्व है। अभयारण्य पहले बीकानेर के महाराजा श्री गंगा सिंह द्वारा एक शिकार स्थल के रूप में इस्तेमाल किया गया था। अभयारण्य में एक खूबसूरत झील है, जो सुंदरता को पूरक करने के अलावा यहां अपनी प्यास बुझाने के लिए रहने वाले जानवरों द्वारा उपयोग की जाती है। यह भारत में चीता पुनरुत्पादन के लिए प्रस्तावित वनों में से एक है।

इस अभयारण्य का दिलचस्प हिस्सा सुंदर गजनेर पैलेस है जिसे अब विरासत और लक्जरी होटल में परिवर्तित कर दिया गया है। गजनेर पैलेस होटल पहले महाराजा और उनके सम्मानित मेहमानों को वाइसरोय और अन्य प्रमुख आंकड़ों समेत इस्तेमाल करता था जिन्हें वार्षिक रेत ग्रौस शिकार गतिविधि के लिए आमंत्रित किया गया था।

गजनेर की झील हजारों में पानी के पक्षियों को आकर्षित करती है जिसमें इंपीरियल रेत ग्रौसे, इंडियन हुबारा बस्टर्ड्स, वॉटर फाउल्स, डेमोइसेल क्रेन और प्रवासी पक्षियों की अन्य किस्में शामिल हैं। गजनेर वन्यजीव अभयारण्य काले हिरन, चिंकारा, एंटीलोप, जंगली सूअर, हिरण, जंगली पक्षियों, नीलगाई (नीले बैल) और रेगिस्तान लोमड़ी का भी घर है जो सुन्दर बगीचे, जंगली जंगलों और राजसी महल के बीच घूमते हैं।

  1. ऊंट सफारी

बीकानेर में रेगिस्तान ऊंट सफारी एक अजीब सवारी है जिसे किसी को जीवन भर में कम से कम एक बार अनुभव करना चाहिए। थार रेगिस्तान पर सफारी छिपकलली, सांप, हिरण, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, ब्लैकबक और इंडियन गैज़ेल की कई प्रजातियों के साथ विविधतापूर्ण है।

बीकानेर में रेगिस्तान ऊंट सफारी और जीप सफारी को व्यवस्थित करने के लिए कई ऑपरेटर हैं। जीवन शैली, संस्कृति, किले, महलों, व्यंजन, रेगिस्तान सफारी, रीति-रिवाजों, रहस्यों, कहानियों आदि का अनुभव कर सकता है। ऊंट सफारी यात्रियों को एक अलग दुनिया में ले जाता है जहां परिदृश्य हरा नहीं है, लेकिन आश्चर्यजनक है और यह एक रोमांच है पूरी तरह से अलग तरह से। सूर्यास्त के सुंदर दृश्य है, जिसकी सुरम्य सुंदरता का वर्णन करने के लिए पर्याप्त शब्द नहीं है। पर्यटक लाइव संगीत और और लोक नृत्य का आनंद भी ले सकते हैं।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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