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विधानसभा में हंगामे के बीच ही कार्यसूची में शामिल विषय पूर्ण

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन आज मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने अलग अलग मुद्दों को लेकर जमकर हंगामा किया, जिसके चलते अध्यक्ष ने कार्यसूची में शामिल विषयों को पूर्ण करने के बाद कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी और सत्र संपन्न हो गया।

हंगामे के दौरान भाजपा के सदस्यों ने दो बार आसंदी के समक्ष पहुंचकर नारेबाजी भी की। अध्यक्ष एन पी प्रजापति ने सदस्यों को बार बार समझाइश दी कि वे शांत होकर सदन की कार्यवाही निर्विघ्न रूप से चलाने में सहयोग दें। शांति नहीं होने पर अध्यक्ष ने कार्यसूची में शामिल विषयों को पूर्ण किया। इस दौरान पांच विधेयकों को संबंधित मंत्रियों की ओर से पेश करने और बाद में उन्हें पारित कराने की औपचारिकता भी की गयी।

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सदन में आज प्रश्नकाल समाप्ति के बाद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सड़कों का मामला उठाया। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वरिष्ठ आईएएस अफसर श्रीमती गौरी सिंह के कथित इस्तीफे का मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में सक्रिय पोषण आहार माफिया ने उनका तबादला करा दिया, जिससे व्यथित होकर वे नौकरी छोड़ने काे विवश हुयीं। श्री चौहान ने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है। ईमानदार अधिकारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है और दागी अफसर खुलकर खेल रहे हैं। इसी के चलते एक जिले में भू अभिलेख अधिकारी ने तो आत्महत्या तक कर ली।

वित्त मंत्री तरुण भनोत ने इन आरोपों पर सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्य मंत्रालय वल्लभ भवन में सभी लोगों का आना जाना रहता है, तो क्या सभी की कार्यशैली पर आरोप लगाए जाएंगे। यह घोर आपत्तिजनक है। एक अन्य मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी आरोपों पर आपत्ति ली और कहा कि श्री चौहान जो आरोप लगा रहे हैं, वह गलत हैं। आईएएस अफसर श्रीमती गौरी सिंह के तबादले की वजह कुछ और है। श्रीमती सिंह ने बगैर मुख्यमंत्री से चर्चा करते हुए पंचायत चुनावों को लेकर फैसला लिया था।

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श्री वर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को बताना चाहिए कि क्या कोई भी अफसर बगैर मुख्यमंत्री से चर्चा किए इस तरह के महत्वपूर्ण फैसला ले सकता है। इसी दौरान पक्ष और विपक्ष के सदस्य एकसाथ खड़े होकर बोलने लगे, जिससे सदन शोरशराबे में डूब गया और एक अवसर पर कुछ भी सुनायी नहीं दिया। इस बीच विपक्ष के सदस्य नारेबाजी करते हुए आसंदी के सामने पहुंच गए। हालाकि अध्यक्ष की समझाइश पर वे वापस आ गए।

कार्यवाही आगे बढ़ने पर एक ध्यानाकर्षण सूचना पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के एक सदस्य ने प्रमुख विपक्षी दल की टोकाटाकी को लेकर टिप्पणी कर दी, जिस पर फिर सदन में हंगामा शुरू हो गया। अब विपक्षी सदस्य सत्ता पक्ष के सदस्यों पर धमकाने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करते रहे और एक बार फिर आसंदी के सामने पहुंच गए। अध्यक्ष श्री प्रजापति की समझाइश के बाद भी विपक्ष की नारेबाजी जारी रही। हंगामे के बीच ही आसंदी ने सदन की कार्रवाई आगे बढ़ा दिया और कार्यसूची में शामिल विषयों को पूर्ण किया।

इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। सत्र मंगलवार को प्रारंभ हुआ था। पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। फिर बुधवार और गुरूवार के बाद आज शुक्रवार को भी हंगामे की स्थिति बनी। सत्र 23 दिसंबर तक प्रस्तावित था। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शनिवार और रविवार को सदन में अवकाश के बाद सोमवार को भी एक बैठक प्रस्तावित थी। इस तरह सत्र के दौरान पांच में से चार बैठकें हो पायीं।

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