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तमिलनाडु में अमित शाह ने किया चुनावी प्रचार का आगाज

चेन्नई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज कन्याकुमारी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे भाजपा नेता पोन राधाकृष्णन के लिए रोड शो करके चुनावी अभियान की शुरुआत की। इससे पहले शाह ने सुचेन्द्रम में हनुमान मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने घर-घर जाकर वोट मांगने के लिए सुचेन्द्रम में विजय संकल्प महासंपर्क अभियान लॉन्च किया। उन्होंने इस पहल के तहत कस्बे के 11 घरों में जाकर प्रचार किया।

भारतीय जनता पार्टी तमिलनाडु विधानसभा और कन्याकुमारी लोकसभा सीट पर एआईएडीएमके और पीएमके के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। इसमें सत्तारूढ़ दल एआईएडीएमके ने भाजपा को 20 विधानसभा सीटें और कन्याकुमारी की लोकसभा सीट दी है। वहीं पीएमके 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, यहां वन्नियार की मजबूत पकड़ है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे राधाकृष्णन ने कहा, तमिलनाडु में भाजपा और एआईएडीएमके का गठबंधन अपराजेय है।

राज्य में 10 साल की सत्ता के बाद भी सत्ता विरोधी फैक्टर कहीं नजर नहीं आता है। केंद्रीय गृह मंत्री की यह यात्रा यह चमत्कारिक साबित होगी। बता दें कि 2019 में राधाकृष्णन को इसी कन्याकुमारी सीट पर कांग्रेस के वसंत कुमार से 3 लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन कोविड के कारण सांसद वसंत कुमार के निधन के बाद अब यहां उपचुनाव हो रहा है।

हालांकि कन्याकुमारी लोकसभा सीट में 6 विधानसभा सीटें आती हैं लेकिन इनमें से किसी पर भी भाजपा नहीं लड़ रही है। इन सभी सीटों पर एआईएडीएमके ही मैदान में है। जबकि किल्लियाउर, विल्वंकोड और पद्मनाभपुरम विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा की स्थिति मजबूत है और भाजपा के कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि यहां से भाजपा के चुनाव चिंह पर चुनाव लड़ा जाएगा। बता दें कि पार्टी यहां किसी भी विधानसभा सीट पर चुनाव नहीं लड़ रही है।

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कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार मुआवजा नहीं दे सकेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना से मरने वाले हर मरीज के परिजनों को मुआवजा नहीं दे सकती है। कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने कहा है कि वह सबको मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना से जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार चार लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना से होने वाली हर मौत को कोविड मौत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने कहा है कि आपदा कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है। सरकार का कहना है कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजा दिया जाए और दूसरी पर नहीं, तो यह गलत होगा। केंद्र ने 183 पन्नों के अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ से होता है। अगर राज्यों को हर मौत के लिए चार लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, तो उनका पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केंद्र का कहना है कि अगर कोरोना से मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा देने का राज्यों को निर्देश दिया गया तो इससे कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड से हुई मौत के रूप में ही रिकार्ड किया जाना चाहिए। फिर चाहे वह मौतें कहीं भी क्यों न हुईं हों।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ अस्पतालों में हुई कोरोना संक्रमितों की मौत को ही कोविड डेथ के रूप में रिकार्ड किया जाता था। घर पर या अस्पताल की पार्किंग या गेट पर होने वाली मौतों को भी कोविड रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा था। इस वजह से मौत के आंकड़ों में विसंगतियां देखने को मिल रही थीं। सरकार ने इस तरह की हर मौत को कोविड डेथ के रूप में दर्ज करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करेगा।

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