बाबरी विध्वंस फैसला भाजपा को दे सकता है सियासी बढ़त

लखनऊ। अयोध्या के ढांचा विध्वंस पर विशेष न्यायालय का फैसला भाजपा को सियासी बढ़त देने के संकेत दे रहा है। इससे पहले राम मंदिर के आए फैसले और अब बाबरी विध्वंस में सभी बड़े नेताओं को बरी होना, आने वाले बिहार चुनाव और एमपी, यूपी में उपचुनाव में भाजपा के लिए काफी मुफीद हो सकते हैं।

यह निर्णय विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती भी खड़ी कर सकते हैं। फैसले के बाद भाजपा की जिस तरह से प्रतिक्रिया आयी और उधर कुछ मुस्लिम नेताओं ने फैसले के खिलाफ अपील की बात कही है।

इससे साफ नजर आ रहा है कि यह मुद्दा आगे गरमाने वाला है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह आने वाले चुनावों में निश्चित तौर पर मुद्दा बनेगा। भाजपा के स्टार प्रचारक इस मुद्दे को लपकने में जरा भी देरी नहीं करेंगे। विरोधी दलों के लिए थोड़ी मुश्किल बढ़ेगी।

क्योंकि उनके लिए अदालत से आए इस फैसले पर संघ परिवार और भाजपा को घेरने में दिक्कत हो सकती है। लेकिन मुस्लिम पक्ष से उठ रही विरोधी आवाज उन्हें जरूर संतत में डाल सकती है। इस मुद्दे को लेकर सियासत गरमाने और आरोप-प्रत्यारोप के दौर को नकारा नहीं जा सकता है। लिहाजा धुव्रीकरण की राजनीति को हवा देने में यह सफ ल हो सकते हैं।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पी.एन. द्विवेदी कहते हैं कि राम मंदिर और ढांचा विध्वंस के फैसले अदालत से भले आए हों, लेकिन इसका भाजपा सियासी लाभ लेने का पूरा प्रयास करेगी। क्योंकि उसके लिए यह मुद्दे पूरी राजनीति की धुरी रहे हैं। वैसे भी राम मंदिर निर्माण के आए निर्णय के बाद मुख्यमंत्री ने जिस प्रकार से अयोध्या पर फोकस किया है। इससे इस बात का अहम संकेत मिलता दिख रहा है।

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