नक्सल क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए भूपेश ने मांगा 11400 करोड़ रूपए

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्र से राज्य के नक्सल क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए 11400 करोड़ रूपए की मांग की है। उन्होने राज्य में एथेनाल संयंत्र लगाने में मदद एवं मंजूरी की मांग के साथ ही राज्य के चर्चित झीरम नक्सल हमले की जांच को एनआईए द्वारा छत्तीसगढ़ को वापस नही किए जाने का मसला उठाया।

बघेल ने पऱिषद की बैठक के बाद पत्रकारों को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में पीडीएस के अलावा अतिशेष धान का मुद्दा उठाते हुए उन्होने राज्य में एथेनाल संयंत्र लगाने में मदद एवं मंजूरी की मांग की,जिस पर शाह ने साकारात्मक सहयोग का भरोसा दिलाया है।

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बैठक में उन्होने बताया कि वनाच्छादित बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्र में गरीबी एवं कुपोषण की दर सबसे अधिक है।सिंचाई के साधन नाम मात्र के है तो बिजली,पानी की भी समस्या है।देश को आक्सीजन देने वाले इन इलाकों के विकास के लिए विशेष मदद की जानी चाहिए। उन्होने बताया कि मात्रा की गलतियों के कारण अनुसूचित जाति एवं जनजाति की जातियों को योजनाओं का लाभ नही मिल पाने का मुद्दा भी उन्होने बैठक में उठाया।

इस पर शाह ने पांच मामलों को केन्द्रीय कैबिनेट में रखने का आश्वासन दिया।उन्होने बताया कि वन क्षेत्र के वनाधिकार पट्टाधारकों को किसान सम्मान निधि का भी लाभ नही मिल रहा है,उन्हे 12 हजार रूपए प्रति वर्ष दिए जाने की मांग उऩ्होने रखी पर शाह ने इस पर कोई टिप्पणी नही की। उन्होने बताया कि नक्सल समस्या पर अलग से कोई चर्चा नही हुई,यह विषय कानून व्यवस्था की चर्चा में एक बिन्दु मात्र था।इस क्षेत्र के विकास पर जरूर पूरा फोकस था।

उन्होने बताया कि जीएसटी का मसला भी उठाया गया।राज्यों को इससे मिलने वाली राशि बहुत ही बिलम्ब से मिल रही है।छत्तीसगढ़ को 2300 करोड़ रूपए अक्टूबर में मिलनी थी लेकिन दिसम्बर तक नही मिली। बघेल ने बताया कि रायपुर विमानतल को अन्तर्राष्ट्रीय विमानतल बनाए जाने,बिलासपुर में विमान सेवा शुरू किए जाने तथा रायपुर विमानतल से कार्गो सेवा शुरू करने की मांग भी उन्होने रखी जिस पर शाह का साकारात्मक रूख था।

उन्होने बताया कि झीरम घाटी मामले में एनआईए के रूख को भी बैठक में उठाया गया।उन्हे बताया गया कि तीन बार एनआईए को मामले की जांच छत्तीसगढ़ को वापस करने के लिए पत्र लिखा जा चुका है,पर उसका कोई उत्तर नही मिला है।जबकि पहले राज्य ने ही यह जांच उसे सौंपी थी।

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