nayaindia bindroo medicate shot terrorists बिंदरू की बहादुर बेटी ने भरी हुंकार
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बिंदरू की बहादुर बेटी ने भरी हुंकार

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में मंगलवार को आतंकवादियों की गोली का शिकार हुए प्रतिष्ठित कश्मीरी पंडित माखन लाल बिंदरू की बहादुर बेटी डॉक्टर श्रद्धा बिंदरू ने बुधवार को आतंकवादियों को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि वे माखन लाल बिंदरू के शरीर को तो मार सकते हैं लेकिन उनकी आत्मा और उनका जज्बा हमेशा जीवित रहेगा। डॉक्टर श्रद्धा ने अपने पिता की हत्या के एक दिन बाद कहा कि वे अपने कश्मीरी पंडित पिता की बेटी हैं। आतंकियों में अगर हिम्मत है तो वे उनके सामने आएं और बहस करें। bindroo medicate shot terrorists 

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पंडित माखन लाल बिंदरू का श्रीनगर में केमिस्ट का बड़ा कारोबार है और वे उन चुनिंदा लोगों में थे, जिन्होंने 90 के दशक में भी कश्मीर नहीं छोड़ा था। आतंकवादियों ने उनको केमिस्ट की उनकी दुकान में घुस कर गोली मार दी थी। उनकी बेटी डॉक्टर श्रद्धा ने कहा है- मेरे पिता बहुत मेहनती थे। अपने काम के शुरुआती दिनों में वे साइकिल से जाते थे। उन्होंने मुझे और मेरे भाई को पढ़ाया। मेरा भाई यहां का फेमस डायबिटोलॉजिस्ट है। मैं एसोसिएट प्रोफेसर हूं। मेरी मां महिला होते हुए हमारी मेडिकल संभालती हैं। इससे ही समझ सकते हैं कि मेरे पिता का हौसला कितना बुलंद है। ये सब उनके जज्बे का ही नतीजा है।

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उन्होंने कहा- आतंकी मेरे पिता के शरीर को तो खत्म कर सकते हैं, लेकिन उनकी आत्मा हमेशा अमर रहेगी। जिसने भी मेरे पिता को गोली मारी है, उसे चुनौती देती हूं। वह सामने आए और मुझसे बहस करे। नहीं कर पाएगा, क्योंकि आतंकी सिर्फ पीठ पीछे ही गोली मार सकते हैं। मैं अपने पिता की बेटी हूं, औकात है तो आओ मेरे सामने और मुझसे बात करो। श्रद्धा बिंदरू ने कहा- हिंदू होने के बाद भी मैंने कुरान पढ़ी है। कुरान कहती है- शरीर तो एक चोला है, जिसे बदला जा सकता है, लेकिन किसी के जज्बे को कभी खत्म नहीं किया जा सकता। माखनलाल बिंदरू की आत्मा हमेशा अमर रहेगी।

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गौरतलब है कि माखनलाल बिंदरू श्रीनगर के प्रमुख केमिस्ट थे। उनका परिवार तीन पीढ़ियों से श्रीनगर में दवाओं का कारोबार करता आया है। जब 1990 में आतंकवाद चरम पर था, तब भी वे अपना घर छोड़कर नहीं गए। श्रीनगर में दशकों से यह बात मशहूर है कि जो दवा कहीं नहीं मिलेगी, बिंदरू की दुकान पर मिलेगी। लोगों को उन पर इसलिए भी भरोसा था कि वे नकली दवाओं के खिलाफ लगातार बोलते रहते थे।

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