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नेताओं के मुकदमों की वापसी मुश्किल होगी

Chhattisgarh Court In Parking :

cases against mps mlas नई दिल्ली। नेताओं के ऊपर दर्ज मुकदमे अब आसानी से वापस नहीं हो पाएंगे। कई राज्यों में सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं के मुकदमे वापस किए जाने की घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त तेवर दिखाए हैं। सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को इस मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया और कहा कि हाई कोर्ट की इजाजत के बिना सासंदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस नहीं लिए जाएंगे।

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि राज्य सरकारें संबंधित हाई कोर्ट की इजाजत के बिना केस वापस नहीं ले सकेंगी। हाल के केरल के मामले में वहां की उच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर भी फैसला करेगी। अदालत ने यह भी कहा कि सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जरनल अपने चीफ जस्टिस को सांसद और विधायकों के खिलाफ लंबित या मामलों के निपटारे की जानकारी दें। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी भाजपा विधायकों के ऊपर से 76 मुकदमे वापस लेना चाहती है। इसी तरह कर्नाटक सरकार भाजपा विधायकों के ऊपर से 61 मुकदमे वापस लेना चाहती है।

Examination Issue in Supreme

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बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत और अन्य अदालतों से कहा है कि वे सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई जारी रखें। सासंदों, विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई के जल्दी निपटारे की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट स्पेशल बेंच का गठन करेगा। अदालत ने इसके साथ ही सासंदों, विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों पर स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल न करने पर केंद्र सरकार से नाराजगी भी जताई।

चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा- हमने शुरू में ही केंद्र से आग्रह किया था कि वो सांसदों, विधायकों से संबंधित लंबित मामलों में गंभीर हो, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से कुछ नहीं हुआ। कोई प्रगति नहीं हुई। ईडी की स्टेट्स रिपोर्ट पेपर में छपने पर नाराजगी जताते हुए चीफ जस्टिस ने कहा- आज हमने पेपर में रिपोर्ट पढ़ी। सब मीडिया को पहले मिल जाता है। एजेंसी अदालत को कुछ नहीं देती। ईडी का हलफनामा भी फॉर्मेट में नहीं है और इसमें सिर्फ आरोपियों की सूची है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने के लिए आखिरी मौका दिया। अदालत ने उसे दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

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