केंद्र सरकार का उद्देश्य कोरोना मृत्युदर को कम करना है: हर्षवर्धन - Naya India
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केंद्र सरकार का उद्देश्य कोरोना मृत्युदर को कम करना है: हर्षवर्धन

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ़ हर्षवर्धन ने आज कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर कोरोना वायरस कोविड-19 के संक्रमितों की पहचान करके और प्रभावी चिकित्सकीय प्रबंधन के जरिये मरीजों की मृत्युदर को कम करना है।

डॉ़ हर्षवर्धन की अगुवाई में आज हुई मंत्रिमंडल समूह की 18वीं उच्चस्तरीय बैठक में देश में कोविड-19 संक्रमण के मौजूदा हालात और संक्रमण की रोकथाम के लिए भविष्य में उठाये जाने कदमों पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि देश में कोविड-19 संबंधित स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचे को मजबूत किया गया है। देश में इस वक्त कुल 3,914 अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और कोविड केयर सेंटर कोरोना संक्रमितों के उपचार में जुटे हैं।

इन स्वास्थ्य केंद्रों में 3,77,737 आइसोलेशन बेड(आईसीयू सपोर्ट रहित), 39,820 आईसीयू बेड और 1,42,415 आक्सीजन सपोर्टेड बेड हैं। इसके अलावा अब तक कुल 213.55 लाख एन95 मास्क, 12094 लाख पीपीई किट और 612.57 लाख हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की गोलियां वितरित की जा चुकी हैं।

डॉ. हर्षवर्धन ने अपने संबोधन में कहा , हमारा ध्यान अब कोविड-19 संक्रमण के प्रबंधन पर होना चाहिए। इसके लिए कंटेनमेंट और सर्विलांस के सख्त कदम उठाये जाने चाहिए, जांच क्षमता का पूर्ण इस्तेमाल करना चाहिए, किसी अन्य बीमारी से ग्रसित व्यक्ति और बुजुर्गों पर ध्यान देना चाहिए।

आरोग्य सेतु जैसे डिजिटल टूल के माध्यम से उभरते हॉटस्पॉट का पूर्वानुमान करना चाहिए और मरीजों की अस्पताल में भर्ती की प्रक्रिया अबाधित होनी चाहिए तथा स्वास्थ्य आधारित बुनियादी ढांचे की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। हमारा लक्ष्य कोरोना संक्रमितों काे शीघ्र चिह्नित करके और प्रभावी चिकित्सकीय प्रबंधन के जरिये राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर कोरोना संक्रमितों की मृत्युदर कम करना और संक्रमण की रोकथाम करना है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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