चारधामयात्रा 2021 : खुल गये है पंचकेदार के कपाट, कोरोना के कारण इस बार भी व्यापार ठप - Naya India
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चारधामयात्रा 2021 : खुल गये है पंचकेदार के कपाट, कोरोना के कारण इस बार भी व्यापार ठप

केदारनाथ धाम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। बाबा केदार के भक्त कपाट खुलने का बसब्री से इंतज़ार करते रहते है। लेकिन अब भक्तों का इंतज़ार तो खत्म हो चुका है। आज सुबह ब्रह्म मुहुर्त में केदारनाथ मंदिर के कपाट खुल चुके है। बाबा केदार की पूजा-अर्चना सुबह तीन बजे ही शुरु हो गयी थी। फिर पॉच बजे पुरे विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए। मंदिर को 11 क्विटल फूलों से सजाया गया। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर के कपाट छः माह पश्चात खोल दिए गए है। बाबा केदार का यह धाम ग्याहरवें ज्योतिर्लिंग में से एक है।  मेष लग्न में कपाट खुलते ही सबसे पहली प्रार्थना जिलाधिकारी के हाथों प्रधानमंत्री मोदी के नाम से की गई। मंदिर खुलते समय मुख्य पुजारी के साथ कुछ लोग ही मौजूद रहे। बाबा के कपाट खुलने के मौके पर रावल भीमाशंकर लिंग, मुख्य पुजारी बागेश लिंग, जिलाधिकारी मनुज गोयल, देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्याधिकारी बीड़ी सिंह मौजूद रहे। मंदाकिनी एवं सरस्वती नदी के संगम पर स्थित केदारनाथ मंदिर में इस बार भी कपाटोद्धाटन सामारोह सुक्ष्म रूप से आयोजित किया गया। कोरोना महामारी के कारण इस बार श्रद्धालुओं पर चारधाम यात्रा की पाबंदी रहेगी। कपाट खुलते ही बारम्बार इस वर्ष भी कोरोना महामारी को खत्म करने की भी प्रार्थना की गई।

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पंच केदार के कपाट भी खुले

केदारनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग के साथ पंच केदार में से भी एक है। आज शुभ अवसर पर पंच केदार के कपाट भी खुल चुके है। केदारनाथ, तुंगनाथ, मध्यमहेश्वर,कल्पेश्वर, रूद्रनाथ महादेव पंच केदार में शामिल है। तुंगनाथ महादेव विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित है। पांचों केदार के कपाट दिवाली के पास शीतकाल आते ही बंद कर दिये जाते है। और एक साथ खोले जाते है। इनमें से कल्पेश्वर महादेव के कपाट वर्ष भर खुले रहते है।

कोरोना के कारण व्यापार हुआ ठप

कोरोना के कारण पिछले वर्ष भी व्यापार बंद हुआ था। पिछले वर्ष चारधाम यात्रा तो हुई थी लेकिन इतनी संख्या में श्रद्धालु नहीं पहुंचे थे। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी व्यापार पर अच्छाखासा असर पड़ा है। चारधाम यात्रा शुरु होते ही पहाड़ी लोगों की कमाई का साधन भी शुरु हो जाता है। शीतकाल में पहाड़ी लोग नीचे मैदानों की तरफ आ जाते है। जैसे ही चारधाम यात्रा शुरु होती है वैसे लोग उपर जाकर अपनी रोजी-रोटी चलाते है। केदारनाथ मंदिर में पालकी, खच्चर वाले छः महीने इंतज़ार करते है। मंदिर जाने के लिए 21 किमी की चढ़ाई करनी पड़ती है। जिसके लिए लोग पालकी, खच्चर का सहारा लेते है। हेलिकॉप्टर से भी लोग यात्रा करते है। इसके लिए लोगों ने पहले से बुकिंग करवा दी थी। लेकिन अब श्रद्धालुओं को बुकिंग के हैसे वापस मिल जाएंगे। उतराखंड से ही नहीं बाहर से भी लोग चारधामयात्रा में अपना पेट भरने जाते है। ट्रेक में छोटी-छोटी दुकाने लगाकर भी अपनी जीविका चलाते है। लेकिन इस बार कोरोना के कारण हजारों लोगों के सपने टूटेंगे। कोरोना ने अनेक लोगों के कमाई पर अपनी काली छाया डाली है। इस वर्ष कोई भी चारधाम में यात्रा में शामिल नहीं हो सकता है। होटल और गेस्ट हाउस में कमाई करने वालों पर भी कोरोना का साया पड़ा है। होटल वाले भी इस बार चारधाम यात्रा में कमाई नहीं कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री रावत ने दी शुभकामनाएं

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए लिखा कि विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट आज सोमवार को प्रातः 5 बजे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अनुष्ठान के बाद खोल दिए। मेष लग्न के शुभ संयोग पर मंदिर का कपाटोद्घाटन किया गया। मैं बाबा केदारनाथ से सभी को निरोगी रखने की प्रार्थना करता हूं। तीरथ सिंह रावत ने आगे लिखा कि ”केदारनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) आदरणीय श्री भीमाशंकर लिंगम् जी की अगुवाई में तीर्थ पुरोहित सीमित संख्या में मंदिर में बाबा केदार की पूजा-अर्चना नियमित रूप से करेंगे। मेरा अनुरोध है कि महामारी के इस दौर में श्रद्धालु घर में रहकर ही पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करें।

अक्षय तृतीया के दिन रवाना हुई डोली

बाबा केदारनाथ की डोली शीतकाल में छः वर्ष के लिए ऊखीमठ में निवास करती है। ऊखीमठ में ही बाबा की पूजा-अर्चना की जाती है। बाबा केदार की चल विग्रहडोली 14 मई को अक्षयतृतीया के दिन ऊखीमठ से रवाना हुई थी। उसके बाद गौरीकुंड में गौरी मां के मंदिर में विश्राम किया । अगले दिन डोली केदारनाथ मंदिर के लिए रवाना हो गई। पहली बार केदार की डोली दो दिन पहले ही मंदिर पहुंच चुकी थी। 15 मई को डोली केदारनाथ मंदिर पहुंच गई। इसके बाद मंदिर का श्रंगार किया। फिर आज सुबह मंदिर के कपाट विधि-विधान से खोल दिए गए।

हमेशा जलती रहती है अखंड ज्योत

मंदिर बंद करते समय मंदिर में अखंड ज्योत जलाई जाती है। मंदिर में पुरे वर्ष अखंड ज्योत जलाई जाती है। जो हमेशा जलती रहती है। मंदिर खुलते समय वो अखंड ज्योत जलती ही रहती है। मान्यता के अनुसार शीतकाल में जब मंदिर बंद कर दिया जाता है तब देवगण इस मंदिर में पुजा करते है। केदारनाथ मंदिर से कुछ उपर भैरवनाथ का मंदिर स्थित है। छः माह  भैरवनाथ ही इस मंदिर की रखवाली करते है। जब भैरवनाथ के कपाट खुलेंगे तब ही मंदिर में आरती की जाएगी। इस मंदिर में पांच नदियों का सगंम स्थल भी है। सरस्वती नदी केदारनाथ मंदिर के किनारे ही दिखती है फिर लुप्त हो जाती है।

ऑनलाइन चारधाम के दर्शन कराएगी उत्तराखंड सरकार

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और देश दुनिया के तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से इस साल चारधाम यात्रा को स्थगित किया गया है। ऐसे में संकट के इस समय श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए भक्तों के लिए सरकार चारधाम के वर्चुअल दर्शन कराने की तैयारी कर रही है। जिससे घर बैठे लोग चारधाम के दर्शन कर सकेंगे। इस संबंध में पर्यटन मंत्री  सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के साथ भी चर्चा की।

यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ के वर्चुअल दर्शन की व्यवस्था करने से चारों धामों के दर्शन के इच्छुक श्रद्धालु मंदिर के गर्भगृह को छोड़कर बाकी मंदिर परिसर के ऑनलाइन दर्शन और ऑडियो के माध्यम से पूजा अर्चना कर सकेंगे। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन को ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। पर्यटन मंत्री ने कहा कि देश-विदेश के तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार की ओर से चारधाम को स्थगित करने का फैसला लिया है। श्रद्धालुओं की भावना का आदर करते हुए चारधाम के वर्चुअल दर्शन करने के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे कोरोनाकाल में घर पर सुरक्षित रहकर तीर्थयात्री चारधाम के वर्चुअल दर्शन करने के साथ पूजा-पाठ और भोग लगाने के साथ आरती भी कर सकेंगे।

 

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