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चीफ जस्टिस ने न्याय प्रणाली पर उठाए सवाल

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जयपुर। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने देश की अपराध न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि आज न्याय की लंबी प्रक्रिया ही लोगों के लिए सजा बन गई है। उन्होंने एक पुरानी कहावत को दोहराते हुए कहा कि ‘प्रोसेस इज पनिशमेंट’। चीफ जस्टिस ने जल्दबाजी में और अंधाधुंध गिरफ्तारियों और अपराधियों को जमानत मिलने में हो रही देरी पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा- आज जैसे हालात हैं उसमें हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली की प्रक्रिया ही सजा है। चीफ जस्टिस और केंद्रीय कानून मंत्री की मौजूदगी में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कई गंभीर सवाल उठाए।

जयपुर में आयोजित 18वीं भारतीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के सम्मेलन में चीफ जस्टिस ने विचाराधीन कैदियों को लंबे समय तक जेल में रखने के मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत बताई और कहा- हमें आपराधिक न्याय प्रशासन की दक्षता को भी बढ़ाने के लिए एक समग्र योजना की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पुलिस का प्रशिक्षण, संवेदीकरण और जेल प्रणाली का आधुनिकीकरण आपराधिक न्याय के प्रशासन में सुधार का एक पहलू है। इसमें केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजीजू, सुप्रीम कोर्ट के अन्य वरिष्ठ जज और राजस्थान हाइ कोर्ट के जज भी मौजूद थे।

इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश की न्याय व्यवस्था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में देश के अंदर तनाव और हिंसा का माहौल है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी को चाहिए कि वे हिंसा के खिलाफ देश को संदेश दें। गहलोत ने न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा नूपुर शर्मा मामले में टिप्पणी करने पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- हमें सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों द्वारा जो कहा गया उसे सोचना और समझना चाहिए।

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