संदिग्ध 'आरडीएक्स' वाले बैग में चॉकलेट-मिठाई और काजू मिले! - Naya India
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संदिग्ध ‘आरडीएक्स’ वाले बैग में चॉकलेट-मिठाई और काजू मिले!

नई दिल्ली। कभी-कभी सुरक्षा इंतजामों में जरूरत से ज्यादा सतर्कता हास्य का पात्र भी बना देती है। खासकर तब जब ऐसे मामलों में जांच और सुरक्षा एजेंसियां स्व-विवेक का सही इस्तेमाल करने से चूक जाएं, कुछ ऐसा ही हास्यास्पद तमाशा शुक्रवार को इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर मिले संदिग्ध बैग के मामले में सामने निकल कर आया है। दरअसल जिस लावारिस बैग में जांच-सुरक्षा एजेंसियां आरडीएक्स जैसा घातक विस्फोटक समझ रही थीं, उसमें चॉकलेट और मिठाई निकली है।

हालांकि इस बारे में शुक्रवार देर रात पूछे जाने पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ, जो हवाई अड्डे की सुरक्षा में तैनात है) के प्रवक्ता सहायक महानिरीक्षक हेमेंद्र सिंह ने यही कहा, “बैग को कूलिंग-पिट में बंद करके रखा गया है। ताकि विस्फोटक अगर फट भी जाए तो किसी तरह की कोई हानि न हो। 24 घंटे बाद ही इस बात का पता चल सकेगा कि आखिर बैग में है क्या?” उल्लेखनीय है कि गुरुवार और शुक्रवार की मध्य रात्रि में टर्मिनल तीन पर काले रंग का संदिग्ध बैग सीआईएसएफ ने जब्त किया था। मौके पर विस्फोटक विशेषज्ञ स्वान-दल (डॉग स्क्वॉड) भी बुलवा लिया गया। डॉग ने सूंघने के बाद जब बैग को संदिग्ध करार दिया, तो मौके पर तमाम सुरक्षा और जांच एजेंसियों का जमघट लग गया।

आधी रात के बाद से शुक्रवार शाम तक यही तमाशा चलता रहा। आशंका यही बनी रही कि हो न हो लावारिस मिले बैग में आरडीएक्स भी हो सकता है। देर रात हरियाणा के बल्लभगढ़ निवासी शाहिद खान ने इन तमाम आशंकाओं को निर्मूल साबित कर दिया। बैग मालिक ने सामने आकर जब बताया कि, बैग उससे गलती से छूट गया था। बैग में चॉकलेट और मिठाई हैं। यह बात उसने एयरपोर्ट थाने में पहुंचकर बताई। इतना सुनते ही संदिग्ध बैग को ‘कूलिंग-पिट’ में घंटों से उसके अंदर मौजूद विस्फोटक को कथित रुप से ‘ठंडा’ करने की कोशिशों का मजाक उड़ने लगा। एयरपोर्ट पर तैनात दिल्ली पुलिस के एक आला-अफसर ने शनिवार को आईएएनएस को बताया, “बैग स्वामी ने पुलिस को यह भी बताया कि बैग में लैपटॉप चार्जर और कुछ काजू भी रखे हैं।”

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By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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