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चीन ने छिपाए रखा था कोरोना

China Corona Lockdown :
Image Source : Social Media

नई दिल्ली। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैलाने को लेकर आरोपों से घिरे चीन को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। एक नई जांच से पता चला है कि चीन ने एक महीने से ज्यादा समय तक कोरोना का मामला दुनिया से छिपाए रखा था। उसने इस बारे में न तो विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लुएचओ को जानकारी दी थी और न दुनिया के दूसरे देशों से जानकारी साझा की थी। इस वजह से चीन से दुनिया भर में आवाजाही जारी रही और कोरोना का वायरस भी पूरी दुनिया में फैला। corona crisis china hidden

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ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की एक साझा साइबर सिक्योरिटी कंपनी ने एक अध्ययन के आधार पर कोरोना के चीन में बहुत पहले से फैले होने का दावा किया है। इस दावे के मुताबिक चीन ने कोरोना का पहला केस आने की जो तारीख बताई, उससे एक महीने पहले वहां के एक प्रांत में कोरोना टेस्टिंग उपकरणों की बड़ी तादाद में खरीद की गई। साइबर सिक्योरिटी कंपनी इंटरनेट-2.0 के मुताबिक चीन के हुबेई प्रांत में 2019 में आरटी-पीसीआर टेस्ट किट की मांग अचानक बढ़ गई थी और इसने पहले के मुकाबले दोगुनी संख्या में टेस्टिंग किट खरीदी थी।

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इंटरनेट 2.0 की रिपोर्ट के आधार पर निक्केई एशिया ने बताया कि 2019 के दौरान हुबेई प्रांत में पीसीआर परीक्षणों पर करीब 67.4 मिलियन युआन यानी करीब साढ़े 10 मिलियन डॉलर खर्च किए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि पीसीआर टेस्ट के आदेश विश्वविद्यालयों में दोगुने हो गए थे, जबकि चीनी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र में यह पांच गुना बढ़ गया था और पशु परीक्षण ब्यूरो में इसमें दस गुना बढ़ोतरी हुई थी। इस खरीद का बढ़ना मई में ही शुरू हो गया था। तभी वायरस की उत्पत्ति और उसके प्रसार में चीन की भूमिका और संदिग्ध हो गई है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई से अक्टूबर तक, खासतौर से वुहान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से खरीदारी में तेजी से बढ़ोतरी हुई। संस्था ने 2019 में पीसीआर परीक्षणों पर 8.92 मिलियन युआन खर्च किए, जो पिछले वर्ष यानी 2018 की तुलना में लगभग आठ गुना ज्यादा है। चीन में पीसीआर टेस्ट किट की खरीद मई में ही बढ़ गई थी और जुलाई में तो इसमें जबरदस्त तेजी आ गई थी लेकिन उसने 31 दिसंबर 2019 को डब्लुएचओ को बताया था कि उसके यहां एक अजीब सा निमोनिया फैला है।

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