covid death guidelines icmr कोरोना से हुई मौत के लिए दिशा-निर्देश जारी
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कोरोना से हुई मौत के लिए दिशा-निर्देश जारी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण से हुई मौतों का पता लगाने के दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। कोरोना से मरने वालों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए यह बेहद जरूरी था। केंद्र सरकार ने सर्वोच्च अदालत को बताया है कि कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के मृत्यु प्रमाणपत्र पर इसे मौत के कारण के तौर पर दर्ज किया जाएगा। covid death guidelines icmr

सरकार ने बताया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय और इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर ने नए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं, जिसके तहत कोरोना से संबंधित मौतों में आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइन बनने में देरी पर नाराजगी जताई थी। सर्वोच्च अदालत के इस मामले में सख्ती दिखाए जाने के 10 दिन बाद सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए।

इन दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सिर्फ उन मौतों को कोरोना संबंधित मौत माना जाएगा, जिनमें मरीज का आरटी-पीसीआर टेस्ट, मॉलिक्यूलर टेस्ट, रैपिड-एंटिजन टेस्ट किया गया हो या किसी अस्पताल में या घर पर डॉक्टर ने जांच करके कोरोना संक्रमण की पुष्टि की हो। जांच के 30 दिन के अंदर हुई मौत को कोरोना से हुई मौत माना जाएगा। ऐसे मरीजों की मौत का कारण कोरोना मान कर मृत्यु प्रमाणपत्र में इसकी जानकारी दी जाएगी। किसी संक्रमित के जहर खाने, आत्महत्या  करने, हत्या या दुर्घटना सहित दूसरे कारणों से होने वाली मौतों को कोरोना संबंधित मौत नहीं माना जाएगा।

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इसके अलावा दिशा-निर्देश में यह भी कहा गया है कि ऐसे मरीज जिनकी अस्पताल में या घर पर मौत हुई और जिसमें पंजीकरण संस्था को जीवन और मृत्यु पंजीकरण कानून के तहत मेडिकल सर्टिफिकेट का फॉर्म चार और चार-ए दिया गया है, सिर्फ उनकी मौत ही कोरोना संबंधित मानी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट को दिए गए हलफनामे में कहा गया है- आईसीएमआर के अध्ययन के मुताबिक, किसी व्यक्ति के कोरोना संक्रमित होने के 25 दिनों के अंदर 95 फीसदी मौतें हो जाती हैं। इसलिए नियमों में बदलाव करते हुए अब कोरोना टेस्ट की तारीख या कोरोना संक्रमित पाए जाने के दिन से 30 दिन के अंदर होने वाली मौतों को कोरोना संबंधित मौत माना जाएगा, भले ही मरीज की मौत अस्पताल या घर में बनी फैसिलिटी से बाहर हो।

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हालांकि, अगर किसी कोरोना मरीज की अस्पताल या घर में बनी फैसिलिटी में भर्ती रहते हुए 30 दिन के बाद मौत होती है, तो इसे कोरोना संबंधित मौत माना जाएगा। गाइडलाइन में यह भी बताया गया है कि अगर किसी मौत के मामले में मृत्यु प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है या मृतक का परिवार मृत्यु प्रमाणपत्र में दिए गए मृत्यु के कारण से संतुष्ट नहीं है तो ऐसे लोगों की शिकायतें सुनने के लिए जिला स्तर पर एक कमेटी बनाई जाएगी।

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