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शिंदे गुट को अदालत से राहत

Farmers reach Supreme Court

नई दिल्ली। शिव सेना के बागी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। सर्वोच्च अदालत ने 16 बागी विधायकों को डिप्टी स्पीकर के नोटिस का जवाब देने के लिए 14 दिन की मोहलत दे दी है। डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल ने एकनाथ शिंदे सहित शिव सेना के 16 विधायकों को नोटिस जारी करके सोमवार की शाम तक जवाब देने को कहा था। कारण बताओ नोटिस में कहा गया था कि क्यों न उनकी सदस्यता रद्द कर दी जाए। शिंदे और बाकी 15 विधायकों ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी, जिसे उसी समय स्वीकार कर लिया गया था और सोमवार को सुनवाई करके अदालत ने सभी बागियों को राहत दे दी।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सभी विधायकों को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश भी दिया। सर्वोच्च अदालत में अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी। शिंदे और बागी विधायकों ने डिप्टी स्पीकर की ओर से दिए गए अयोग्यता संबंधी नोटिस को चुनौती दी थी और साथ ही विधानसभा में शिव सेना विधायक दल के नेता के तौर पर अजय चौधरी की नियुक्ति के उनके फैसले को भी चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए दोनों जजों ने शिंदे गुट, महाराष्ट्र सरकार और शिव सेना की दलीलें सुनीं। इसके बाद अदालत ने विधायकों को अयोग्य ठहराने वाले डिप्टी स्पीकर के नोटिस पर जवाब देने के लिए 11 जुलाई तक का वक्त तय किया।

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र भवन, डिप्टी स्पीकर, महाराष्ट्र पुलिस, शिव सेना विधायक दल के नेता अजय चौधरी और केंद्र को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी विधायकों को सुरक्षा मुहैया कराने और यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है। डिप्टी स्पीकर को अदालत के सामने अपना जवाब पांच दिन में पेश करना है। सर्वोच्च अदालत ने बहुमत साबित करने के लिए फ्लोर टेस्ट को लेकर कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है।

अदालत के सामने बागी विधायकों की ओर से डिप्टी स्पीकर की स्थिति को लेकर सवाल उठाया गया। उन्होंने कहा कि डिप्टी स्पीकर की स्थिति स्पष्ट नहीं है और उनको हटाने के लिए नोटिस दिया गया था, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया। बागी विधायकों का कहना है कि जब डिप्टी स्पीकर की खुद की स्थिति स्पष्ट नहीं है तो वे नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं।

दूसरी ओर डिप्टी स्पीकर की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाया कि बागी विधायक पहले हाई कोर्ट न जाकर सुप्रीम कोर्ट क्यों आए। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी केस में ऐसा नहीं होता है कि स्पीकर के सामने कोई मामला पेंडिंग हो और कोर्ट ने उसमें दखल दिया हो। जब तक स्पीकर फाइनल फैसला न ले ले, कोर्ट कोई एक्शन नहीं लेती। उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों ने डिप्टी स्पीकर के खिलाफ जो नोटिस दिया था, उसका फॉर्मेट गलत था, उसे रजिस्टर्ड ई-मेल से नहीं भेजा गया था और विधानसभा के दफ्तर में भी नहीं भेजा गया था इसलिए उसे खारिज किया गया।

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