कोरोना वायरस से अर्थव्यवस्था को बचाने के उपायों की घोषणा शीघ्र: सीतारमण

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि कोरोना वायरस के आर्थिक प्रभावों से निपटने के उद्देश्य से निर्यातकों, आयातकों और विभिन्न उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श कर लिया गया है और संबंधित विभागों के साथ चर्चा के बाद शीघ्र इसके लिए उपायों की घोषणा की जाएगी। सीतारमण ने यहां निर्यात – आयात से जुड़ी कंपनियों और घरेलू स्तर पर विनिर्माण में लगे उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ ही विभिन्न उद्योग संगठनों के साथ कोरोना वायरस के अर्थव्यवस्था अर्थात विनिर्माण, निर्यात, आयात और एमएसएमई पर पड़ रहे प्रभावों पर चर्चा की और इससे निपटने के सुझाव सुने।

इसके बाद उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से भारतीय आयात निर्यात के साथ ही दूसरे उद्योग भी प्रभावित हुए हैं। मंगलवार की बैठक में फार्मा, टेलीकॉम, आईटी हार्डवेयर निर्माता, इलेक्ट्रानिक्स, पेंट, केमिकल, रसायन, उर्वरक, खाद्य तेल, शिपिंग, ग्लास, मोबाइल विनिर्माण, सर्जरी और सर्जिकल उपकरण, पर्यटन आदि क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की राय ली गयी है। इस बैठक में वाणिज्य सचिव, भारी उद्योग सचिव, टेलीकॉम सचिव और कई अन्य विभागों के सचिव भी मौजूद थे। कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था, मेक इन इंडिया या निर्यात प्रभावित होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अभी इसका मूल्याकंन नहीं किया गया है।

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मेक इन इंडिया के प्रभावित होने की आशंका नहीं है। उन्होंने कहा कि इसको एक चुनौती के साथ ही अवसर के तौर पर देखने की जरूरत है क्योंकि इससे सिर्फ आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू स्तर पर कच्चे माल के उत्पादन पर अधिक जोर दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालय के अलग अलग विभाग के सचिव दूसरे मंत्रालयों के सचिवों के साथ कल सुबह में इस पर चर्चा करेंगे और इस संबंध में उन संबंधित मंत्रालयों और विभागों की जरूरतों के बारे में बात की जायेगी। उसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से विचार विमर्श के बाद कोरोना वायरस से अर्थव्यवस्था को बचाने के उपायों की घोषणा की जायेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि चीन से आने वाले उत्पाद कुछ बंदरगाहों पर अटके पड़े क्योंकि माल पहुंच गया है लेकिन उसके कागजात नहीं पहुंचे हैं। इसके मद्देनजर सीमा शुल्क विभाग को इस समस्या का हल करते हुये आयातकों को माल की डिलीवरी शुरू करने के लिए कहा गया है। इसके लिए आयातक के स्व: प्रमाणन पर विचार विमर्श किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही कोरोना वायरस के मामलों के समाप्त होने के बाद आवक में भारी वृद्धि होने पर बंदरगाहों पर लगने वाले जाम से निपटने के लिए अभी से उपाय करने पर विचार शुरू कर दिया गया है।

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