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नई शिक्षा नीति का मसौदा नहीं लागू करने की मांग

नई दिल्ली। देश में शिक्षा से जुड़े करीब 30 संगठनों के ज्वाइंट फोरम फॉर मूवमेंट ऑन एजुकेशन ने मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर नई शिक्षा नीति के वर्तमान मसौदे को लागू न करने की अपील की है और कहा है कि देश में मौजूदा स्थिति को देखते हुए शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का 10 फीसदी खर्च किए जाने की जरूरत है।

फोरम द्वारा आज यहां जारी विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि यह मंच वर्षों से देश में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दे लगातार उठा रहा है और वह सेमिनार आदि कर इस विषय पर विचार विमर्श भी करता रहा है। उसने 19 मार्च को एक बड़ी रैली निकालने का प्रस्ताव भी किया था लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (काेविड-19) के कारण उसे स्थगित करना पड़ा।

डॉ. निशंक को लिखे पत्र में फोरम ने ऑनलाइन परीक्षा और शिक्षा के बारे में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के आदेशों परिपत्रों को वापस लेने की मांग की और कहा कि देश में ऑनलाइन के माध्यम से छात्रों में पढ़ाया नहीं जा सकता है क्योंकि छात्रों और शिक्षकों के साथ सीधे रूप से संवाद किए बिना संभव नहीं है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि मूक्स और ओडीएल जैसे मंच से प्राप्त ऑनलाइन शिक्षा सहायक सामग्री तो हो सकती है लेकिन उस से मुख्य और आधारभूत शिक्षा नहीं पाई जा सकती है। विज्ञप्ति में भी कहा गया है कि विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को स्थाई करने की जरूरत है तथा वर्तमान पेंशन स्कीम को समाप्त कर उसके स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू किए जाने की आवश्यकता है।

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